ग्राम टुडे ख़ास

पर्यावरण दिवस


दीपाली सोढ़ी

पर्यावरण हर जन का रक्षक
हर जन बना पर्यावरण का भक्षक
मेधा खोयी, आधुनिकता बनी पक्षक
बोध पायी, पर्यावरण का बन संरक्षक।

भाते मन को नदियां सरोवर
मोहित करती हवा अध्वर
प्राकृतिक,पर्यावरण धरती का सहोवर
रत्नगर्भा की न खत्म करो धरोहर।

करते है, धरणी को वादा
जाने गए,अपनी मर्यादा
बचा कर रखेंगे, पर्यावरण की धर्मादा
धरा पर, न आये कोई आपदा
जनजीवन तभी,अपनाएं जनमर्य्यादा

दीपाली सोढ़ी
गुवाहाटी असम

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