ग्राम टुडे ख़ास

पर्यावरण बचाओ!

डा. अनीता शाही सिंह

धरती चिल्ला रही हमारी
क्या विनाश की कर ही डाली है, तुमने तैयारी
जल-जीवन में निर्मलता का
नामों-निशां न बाकी
साँसों में अब ज़हर घोलती
प्राणवायु वसुधा की
मिट्टी की सोंधी सुगंध भी
रसायनों की मारी
कटते वृक्ष चीखते जाते
अरे मूर्ख इंसानों
क्या विकास है, क्या विनाश है
इतना तो पहचानों
सूखा बाढ़ अकाल सभी
करनी का फल है भारी
बेदर्दी से शोषण करते आए
सदा प्रकृति का
भूल गए अंजाम बुरा ही होता
आया अति का
आज प्रकृति भी कुपित रूप ले
खेले अपनी पारी
धरती के हर जड़ चेतन में
तालमेल कर चलना
सृष्टि संतुलित की संरचना
का ना रूप बदलना
पर्यावरण हमारी धरती की
सुंदरतम धाती है
इसे बचाएं हम सब मिलकर
यही दीप की बाती है।।

डाॅ. अनीता शाही सिंह

प्रयागराज

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