ग्राम टुडे ख़ास

पुष्प यानि फूल और इंसान

श्वेता अरोडा

काश इंसान पुष्प की तरह खिलना सीख ले,प्रकृति से कुछ लेने की बजाए प्रकृति को कुछ देना सीख ले!
काश पुष्प की तरह खिल जाए हर इंसान,
पुष्प की तरह अपनी जड़ो से जुडा रहे हर इंसान!
एक दूसरे को फलता फूलता देख खुश रहना सीख ले!
माली की देख रेख मे जैसे खिलता एक फूल,
वैसे ही मां बाप की छत्र छाया मे,खुश रहे लगा चरणो की धूल!
महकाता अपनी खुशबू से, महफिल को बिना किसी अभिमान के,
काश इंसान भी इंसान को समझे,अभिमान को त्याग के!
जब तक जुड़ा रहता है जड़ो से,जब तक खिलता रहता है
वैसे ही इंसान भी जब तक जमीन से जुडा रहता है,करता नही घमंड, उडता नही आसमानो मे, टिका जमीन पर रहता है!
श्वेता अरोडापुष्प यानि फूल और इंसान काश इंसान पुष्प की तरह खिलना सीख ले,प्रकृति से कुछ लेने की बजाए प्रकृति को कुछ देना सीख ले! काश पुष्प की तरह खिल जाए हर इंसान, पुष्प की तरह अपनी जड़ो से जुडा रहे हर इंसान! एक दूसरे को फलता फूलता देख खुश रहना सीख ले! माली की देख रेख मे जैसे खिलता एक फूल, वैसे ही मां बाप की छत्र छाया मे,खुश रहे लगा चरणो की धूल! महकाता अपनी खुशबू से, महफिल को बिना किसी अभिमान के, काश इंसान भी इंसान को समझे,अभिमान को त्याग के! जब तक जुड़ा रहता है जड़ो से,जब तक खिलता रहता है वैसे ही इंसान भी जब तक जमीन से जुडा रहता है,करता नही घमंड, उडता नही आसमानो मे, टिका जमीन पर रहता है!

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