ग्राम टुडे ख़ास

प्रतिमा उमराव की कलम से

अभिलाषा सिर्फ शब्द नहीं

अभिलाषा सिर्फ शब्द नहीं,
मन की चाहत को बतलाती है।
इच्छा पूरी करने के खातिर,
हर सुलभ रास्ता को दर्शाती है।।

अभिलाषा सिर्फ शब्द नहीं,
जीवन जीने की आशा है।
कुछ नया सृजन करने को,
करती दूर हृदय से निराशा है।।

अभिलाषा सिर्फ शब्द नहीं,
उत्साह का करती संचार है।
नवीन उमंग मन में जगाती,
हर सपने को करती साकार है।।

अभिलाषा सिर्फ शब्द नहीं,
हृदय में उपजा एक उद्गार है।
नित नये स्वप्न देखता मानव,
अभिलाषा ही जिनका आधार है।।

आओ मिलकर अलख जगाएँ

आओ मिलकर अलख जगाएँ,
धरा को प्रदूषण मुक्त बनाएँ।।

साफ-स्वच्छ वायु मिले सबको,
नहीं कटने देंगें जब तरूओं को।
घर-घर में संदेश यही पहुँचाएँ,
धरा को प्रदूषण मुक्त बनाएँ।।
आओ मिलकर अलख जगाएँ।

धरती का श्रंगार विटप है,
जीवन सुख का आधार विटप है।
हम प्रकृति के सौन्दर्य को बचाएँ,
धरा को प्रदूषण मुक्त बनाएँ।।
आओ मिलकर अलख जगाएँ।

पॉलीथीन का बन्द करो उपयोग,
प्रदूषण फैलाने में करती सहयोग।
इकोफ्रेण्डली बन हरियाली लाएँ,
धरा को प्रदूषण मुक्त बनाएँ।।
आओ मिलकर अलख जगाएँ।

मेरा वतन

मेरा वतन सबसे प्यारा है,
तन-मन-धन उस पर वारा है।
तिरंगा हमको जान से प्यारा है,
झुकने न देंगे प्रण ये हमारा है।।

अनगिनत शहीदों ने प्राण दिया,
बहुत दिनों तक संघर्ष किया।
मातृभूमि की आज़ादी की खातिर,
हँसते-हँसते खुद को बलिदान किया।।

आबाद रहे, आजाद रहे देश मेरा,
कीर्ति पताका फहरे है अरमान मेरा।
आकाश से ऊँचा रहे तिरंगा मेरा,
देशप्रेम से उल्लसित हो हृदय मेरा।।

स्वच्छता अभियान गीत


तर्ज- ज्योति से ज्योति जलाते चलो…….

स्वच्छ से स्वच्छ बनाते चलो,
अभियान को आगे बढ़ाते चलो।
रह न पाये कोई गन्दगी,
सबको यह समझाते चलो।।
इस अभियान….

स्वच्छ बने भारत अपना,
गाँधी जी का था यह सपना।
मोदी जी ने अभियान चलाया,
घर- घर इसको पहुँचाया।।
सफाई के फायदे बताते चलो,
इस अभियान…..

कहीं न कूड़ा कचरा फेंको,
सब जगह स्वच्छता रखो।
सफाई को समझो जिम्मेदारी,
धरती माता को साफ रखो।।
व्यक्तिगत सफाई अपनाते चलो,
इस अभियान…

स्वच्छ से स्वच्छ बनाते चलो,
इस अभियान को आगे बढ़ाते चलो।

विपदा

कैसी विपदा की विकट घड़ी आई है,
मन में सबके घोर निराशा छाई है।
चहुँओर मृत्यु मानो तांडव कर रही
असहनीय पीड़ा हृदय में बढ़ रही।।

हे! ईश्वर, इतना निर्दयी क्यों हुआ?
सृष्टि रची, फिर संहारक क्यों हुआ?
क्या अपनी संतानों से तुमको प्यार नही,
दयावान! अब दया करो, निर्ममता नहीं।।

करोना महामारी विचित्र रूप दिखाये,
छोटे- बडे़, युवा सब अपनी जान गंवाये।
सभी जन एक दूसरे को धीरज बंधायें,
चिन्ता में डुबे सब जन, कैसे जान बचायें।।

स्तब्ध सभी, आह! कैसे दुर्दिन आये हैं?
स्वजनों की विदाई में कोई साथ न जाए।
माता- पिता, और सभी रक्त सम्बंधी का,
अन्तिम संस्कार भी स्वयं करने न पाए ।।

हे!पालनहार, सकल भुवन को रचने वाले, करो कृपा, अब विनम्र विनती सुनो हमारी
बहुत दंश झेल चुका मानव दुष्कर्मों का,
करो क्षमा,अनादि अनन्त महिमा तुम्हारी ।।

नाम- प्रतिमा उमराव

स०अ०
उच्च प्राथमिक विद्यालय

(संविलियन विद्यालय 1-8)

अमौली, अमौली, फतेहपुर

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