ग्राम टुडे ख़ास

प्रभु तुम मिलने आओ

शिखाअरोरा

धरा पर फिर मिलने आओ गोपाल,
अस्मत कन्याओं की बचाओ नंदलाल ,
भ्रुण हत्याओं पर रोक लगाओ,
इंसान को इंसानियत सिखाओ ब्रजलाल |

जब जब तरह पर पाप बढ़ा हैं,
तेरा यहाँ सुदर्शन चक्र चला हैं ,
गोवर्धन अंगुली पर तुमने उठाया,
गांव सारा उसके नीचे खड़ा हैं |

अहंकार में मानव हैं मरता,
मौत से ही इंसान हैं डरता ,
मोह माया को वह पाता ना छोड़,
कर्मों से अपने गागर हैं भरता |

जैसे रक्षा करी तुमने ब्रज की ,
अब तुम रक्षा करों धरा की,
इंद्र प्रकोप से ब्रज को बचाया,
अत्याचारों से बचाओ धरा को |

त्राहि त्राहि कर आज कन कन ,
अंधकार में फंसा है आज तन-मन,
काल धर रहा अपना विकराल रूप,
नाश हो रहा उसका आज धन जन |

अर्पण तुझ पर शीश अपना कर जाऊंँ,
समर्पण भाव से देश पर मर जाऊंँ,
साथ तुझे मेरे आना होगा ईश्वर,
हृदय में रुप तेरा अपने भर जाऊंँ |

अन्नकूट का भोग तुम्हें लगाएंगे,
प्रभु तेरा दिया तुझको ही चढ़ाएंगे,
मिलने तुमको ही अब आना होगा गोपाल,
प्रेम भक्ति से तुमको हम मनाएंगे ||

शिखा अरोरा (दिल्ली)

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