ग्राम टुडे ख़ास

प्रीयतम जल्दी आना

डॉ अर्चना पाण्डेय

जाते हो लेकिन ये सुनलो
तनिक न देर लगाना
बैठी हूँ मैं आस लगाए
प्रियतम जल्दी आना

काम के हैं तुमको देखो
पथ में न भरमाना
फूलों में कलियों में साजन
मन को न भटकाना

खूब सजाया है मैंने भी
द्वारे अल्पन प्यारा
रीझ न जाना तुम गलियों में
पाकर नया सितारा

नयन तुम्हारे ही दर्शन को
बैठे रहते पागल
जैसे अम्बर में छाए हैं
उजले उजले बादल

बालों के गजरे लेकर तुम
सरपट घर को आना
बैठी हूँ मैं आस लगाए
प्रियतम जल्दी आना

डॉ अर्चना पाण्डेय

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