ग्राम टुडे ख़ास

प्रेम प्रारब्ध

रेखा शाह आरबी

कब तक मिथ्या भ्रम जीते
अब यह हार स्वीकार रहे
सारी दुनिया जीते
बस तुम एक हार रहे।।1।।

मन के गंगा का हमेशा तुम
मथुरा काशी हरिद्वार रहे
बीच भंवर लड़खड़ाती नैया
पर ना कभी प्रेम के पार रहे
सारी दुनिया जीते
बस तुम एक हार रहे।।2।।

यह भी विषम उदगार रहे
तुम प्रेम प्रारब्ध के द्वार रहे
जब भी इस नगर गए
तुम राज कुंवर हर बार रहे
सारी दुनिया जीते
बस तुम एक हार रहे।।3।।

स्वप्न सरीखा यह डगर
मन को रोके बहुत मगर
खोते जाते आभासी दुनिया में
हर क्षण संग और साथ रहें
सारी दुनिया जीते
बस तुम एक हार रहे।।4।।

तुम को पाना जीवन उपकार
खोना भी जीवन का सार
मन के सब जटिलताओं के
तुम रहे सरल आकार
पाना खोना संसार रहे
सारी दुनिया जीते
बस तुम एक हार रहे ।।5।।

रेखा शाह आरबी
जिला बलिया उत्तर प्रदेश

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