ग्राम टुडे ख़ास

प्रेम मिलन

रवि कुमार दुबे

एक रिश्ता है तेरा मेरा, इसे क्या नाम दूं।
संयोगिता कहूँ, राधा कहूँ या कोई और नाम दूं।
कुछ तो है तेरे मेरे दरमियान की तेरी याद आती है।
ये इश्क है या कुछ और है जो मुझे इतना सताती है।
मुझे मालूम है कि तुम भी हमे बेइंतहा चाहती हो।
फिर क्यों इस जमाने की दुहाई देती हो।
कुछ तो है प्रिये ये जान लो तुम, मेरे इस प्यार को पहचान पहचान लो तुम।
ये कसमें ये वादे जाने कहां गए, आंधी सा आया एक रोज़ सारे सपने ढह गए।
ये कैसा प्यार है, ये कैसा साथ है जो निभा ना सकी तुम।
ये कैसा वादा है ये कैसा सपना है जो सजा ना सकी तुम।
मेरा विश्वास है ये आभाष है,एक दिन आओगी जरूर।
इस प्यार भरी कश्ती को सजाओगी जरूर।
फिर भी अगर तुम्हारे मन मे अगर कोई टीस है।
गुस्सा के बाहर निकाल दो उसे वो एक खतरनाक विष है।
मैं शिव सा, तुम पार्वती सी मिलन तो जरूर होगा।
इस जन्म में हो या अगले जन्म में ये तो प्रभु का फितूर होगा।
मैं तो जन्मों जनम तक तुमको अपना मान चुका हूं ।
तुम भी ऐसा ही सोचती हो ये जान चुका हूं।
तोड़ दो सारे बंधन को आओ कुछ अपने लिए जीते हैं।
मैं हूं तुम हो कुछ ऐसे सपनों का घरोंदा सीते हैं।

रवि कुमार दुबे
रेनुसागर, सोनभद्र
8573001630

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