ग्राम टुडे ख़ास

बेटियाँ

नीलम राकेश

हो अपनी ही जाई
या फिर,
दूसरे घर से आई,
नाज़ो से पाली
होती है बेटियाँ ।

तितली सी नाजुक,
चिड़िया सी चहकती,
फूलों सी महकती,
मंदिर की घंटी सी
होती है बेटियाँ ।

बिन बेटी
घर सूना सूना,
पीहर और सासरे के,
आंगन की तुलसी
होती है बेटियाँ ।

सबके मन को भाती,
खुशियों की हैं थाती,
हो दूसरे घर से आई,
या फिर अपनी ही जाई,
खुशियों का भंडार
होती है बेटियाँ ।

नीलम राकेश
610/60, केशव नगर कालोनी

सीतापुर रोड, लखनऊ

उत्तर-प्रदेश-226020
neelamrakeshchandra@gmail.com

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