ग्राम टुडे ख़ास

भारत माता अभिनंदन

मंजूमानस

स्वरचित रचना मौलिक
विषय #भारत माता अभिनंदन

शिर्षक #भारत का रूप अनोखा
विधा #कविता

भारत माँ तुमको अभिनंदन
आवो करे हम मिलकर वंदन
चारो ओर फैली शाखाये
जैसे हिमालय से गिरी जटाएं
गोमुख से हँसती आती
खुद में इठलाती मुस्कुराती
उज्जवल से दंत चमकते
काली काली लट्ट लगती घटायें
उजली साड़ी लाल चुनरिया
माँ पर लगती देखो कितनी प्यारी
मुकुटमणि माँ के सर शोभे
आभा इनकी कितनी सोहे
हरे भरे खेतो खलिहान
लहलहाती करती मधुर गान
नदी सरोवर कलकल बहती
ठंढी हवायें दूर तक चलती
कोयल गाती मीठे गीत
मोर नाचते बनकर मीत
भारत माँ का रूप अनोखा
लगता सुन्दर स्वप्न सलोना
नीला अम्बर चादर ओढ़े
लाल बिंदी में सूरज आये
चाँद की शीतलता सबको भाये
पेड़ पौधे मिकलर माँ का करते श्रृंगार
भारत माता की जय बोले नित्य करो प्रणाम
इस जग में माँ की सुंदरता सा
नही कोई पहचान

कुमारी मंजू मानस
बिहार शिक्षिका
छपरा सारण

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