ग्राम टुडे ख़ास

मन


डॉ मधुबाला सिन्हा

ऐ मन ! चल..
तू कहीं दूर चल…
घबड़ाता है जब तू
या मचल जाता है
अपने – बेगानों की
याद बहुत तड़पता है
जब न बोलना हो
तू मुखर हो जाता है
चुप रहना न जब
साधक बन आता है
नींद जब चाहूँ तो
तारे गिनवाता हैं
चाँद को निहारूँ तब
नयनों को भरमाता है…
चाहता है क्या तू
कभी यह नहीं बताता है
बस मीठी लोरी बन
रागों में बस जाता है
थपकी दे सुलाऊँ तुझे
खुद ही नींद आ जाता है
सपने में खो जाना चाहूँ
ललचा कर दूर हो जाता है..
ऐ मन तू बोल ज़रा
चुप रहक़र क्यों रुलाता है
आगोश में लिपटी हूँ तेरे
बन्धन बांध तू सताता है…
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डॉ मधुबाला सिन्हा
मोतिहारी,चम्पारण
5 जुलाई 2021

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