ग्राम टुडे ख़ास

महिला और पुरुष के मध्य मैत्री सम्बंध संदेहास्पद क्यों?

प्रीति चौधरी “मनोरमा”

उक्त विषय अत्यंत सुंदर है… विचारणीय है … मेरे विचार से एक लड़का और लड़की दोस्त हो सकते हैं।
कभी – कभी हम अपने परिवार वालों से कोई बात साझा नहीं कर पाते हैं , भयवश अथवा संकोचवश…. वहीं दूसरी ओर हमारा कोई प्रिय मित्र होता है जिससे हम अपना मन हल्का कर लेते हैं… उसे अपनी हर बात का साझीदार बना लेते हैं।
कुछ ऐसे राज जो हम अपने माता -पिता या भाई -बहन से नहीं बता सकते हैं वो उस शख़्स से शेयर कर सकते हैं।
वह एक मित्र हमारे सभी नाते-रिश्तेदारों, सगे-सम्बन्धियों से कहीं ज़्यादा हमें समझने वाला होता है। वह हमारी खामोशी पढ़ लेता है। मुस्कुराहट के पीछे छुपा ग़म समझ लेता है।
जरूरी नहीं कि हमारा उससे रक्तसम्बन्ध हो… वह परछाईं की तरह हर समय हमारे साथ होता है।
हम उससे प्रतिदिन न भी मिलें तब भी हमारे रिश्ते में दूरियों का एहसास नहीं होता है।
यह रिश्ता मन से मन का होता है।
विचारों की मलिनता इस पाक रिश्ते को दूषित नहीं करती है।
मेरा मानना है कि एक लड़का -लड़की अवश्य ही दोस्त हो सकते हैं।
इस रिश्ते को शब्दों की परिधि में बाँधा नहीं जा सकता है।
यह रिश्ता दैहिक सुख की चाह नहीं रखता है।
इस निःस्वार्थ दोस्ती के लिए चंद पंक्तियाँ समर्पित करती हूँ–

जो दोस्त एक बार दिल से जुड़ जाते हैं
उनसे मुसीबतों के तूफ़ान भी मुड़ जाते हैं
ऐसे दोस्त बहुत ही कीमती होते हैं
ये अहम से दोस्ती को नहीं खोते हैं,
नहीं चाहिए इन्हें हर जगह प्रथम स्थान
ये करते हैं हमेशा भावनाओं का सम्मान।
इन्हें दोस्त के आँसू नहीं पसंद हैं
इनकी आँखे ईगो से नहीं बंद हैं।
ये लाते हैं दोस्तों के चेहरे पर मुस्कान,
इन्हें नहीं अपने जीतने का अरमान।
इनकी सोच में होता है विस्तार,
ये नहीं जताते रौब और अधिकार।

प्रीति चौधरी “मनोरमा”
जनपद बुलन्दशहर
उत्तरप्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!