ग्राम टुडे ख़ास

महेन्द्र सिंह राज की कलम से

एक पल

पल से है ये पलक बना
या बना पलक से पल
बहुत कीमती हम सबके
जीवन का हर इक पल।

पल पल से घण्टा बनता
पल पल से बने सेकेण्ड,
पल पल से ही मिनट बने
पल का है आदि न एण्ड।

पलक झपकने में इक बार,
जो काल अंश लग जाता है
वही समय निश्चय जानो
एक -एक पल कहलाता है।

जितने अल्प समय में कोई
प्रति – ध्वनि सुन पाता है,
वह अल्पतम कालखण्ड ही
प्रति पल -क्षण कहलाता है।

सेकेण्ड के दसवें भाग को
इक पल हम सब कहते हैं,
हर पल होता बहुत कीमती
हम काल दृष्टि में रहते हैं।

पल की कीमत उससे पूछो
जो पल भर में चूक गया,
जिसके जीवन का सौभाग्य
इक पल भर में ही रूठ गया।

पल भर के अन्तर से ही
जिसका पेपर छूट गया
पल भर के चूकने मात्र से
जिसका किस्मत रूठ गया।

हर पल परिवर्तित सृष्टि यह
हम सबको सन्देशा देती है,
अगरकाल विपरीत चले हम
हमको अशुभ फल देती है।

इसीलिए कहता है राज
हर -पल का उपयोग करो
प्रकति देती हवा जल मुफ्त
उसका समुचित उपयोग करो।

गर उपयोग नहीं उपभोग किया
तो सबको मूल्य चुकाना होगा,
हर इक पल की कीमत समझो
वरना असमय ही जाना होगा।।

गांव का दृश्य

कितना सुन्दर दृश्य है
तरुवर सरिता कूल,
गागर ले गोरी चली
जाए ना पथ भूल।

पशू चराने गाँव का
चलता एक किसान,
गवंयी सुन्दर सभ्यता
पुरा संस्कृति सम्मान।

सुन्दर पावन नीर ले
नदी बहे दिन रात,
द्विकूले सुन्दर वृक्ष हैं
हरे भरे तरु पात।

गागर में जल है भरा
चली लिए निज धाम,
थोड़ा जल्दी पग बढे़
शेष पडे़ अरु काम।

पुल ऊपर से जा रहे
बनिता और किसान,
देख गांव की सभ्यता
बढे़ वसुन्धरा मान।

आज भी गावों में नहीं
नल से मिलता पानी
देख गांव की व्यवस्था
होती सबको हैरानी।

अगर भारत की सभ्यता
देखन चाहें कुछ और,
छोड़ नगर की लालसा
चलें गाँव की ओर।।

महेन्द्र सिंह राज
मैढी़ चन्दौली उ. प्र.

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