ग्राम टुडे ख़ास

माँ की सीख व अभिलाषा- बाल कविता


डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

उठो लाल अब ये आँखें खोलो,
भोर भई मंजन कर मुँह धोलो।

चिड़ियाँ चहकें ये डाली डाली,
गमलों को सींच रहा वनमाली।

दूधिया आया और दूध दे गया,
पेपर वाला ये अख़बार दे गया।

तुम अभी सो रहे बिस्तर छोड़ो,
आलस्य त्याग प्रभु नाम बोलो।

जीवन को समय के संग जोड़ो,
पढ़ो अपनी यह पुस्तक खोलो।

समय की कीमत को पहचानो,
माँ कह रहीहै तो कहना मानो।

कुछ योगासन व करो व्यायाम,
करो नाश्ता पानी घर के काम।

समय से उठ किया करो स्नान,
स्कूल समय पर स्कूल प्रस्थान।

समय से पहुँचें रोज निज स्कूल,
टिफिन ये रखना ना जाये भूल।

पढ़ेंलिखें कक्षा में जो गुरु पढ़ायें,
धारण करो जो संस्कार सिखायें।

पढ़ लिख कर तुम अफसर बनो,
दीन दुःखी के तुम हितकर बनो।

जग में बच्चों खुब नाम कमाओ,
घर स्कूल समाज में मान पाओ।

माता-पिता की यही अभिलाषा,
देश की तुमसे पूरी हो हर आशा।

निज जीवन यह सफल बनाओ,
अपनों को सत्य मार्ग दिखाओ।

सफलता से ये परचम लहराओ,
भारत के झंडे की शान बढ़ाओ।
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.
इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-नार्थ इंडिया
एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,कोलकाता,प.बंगाल
संपर्क : 9415350596

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