ग्राम टुडे ख़ास

मां तो मां

लघुकथा

वीरेन्द्र बहादुर सिंह

ससुराल से आई अबोध कामिनी मम्मी को भेंट पड़ी। मां-बेटी की आंखें खुशी से भीग गईं। मां ने बेटी के लिए तरह-तरह की चीजें बना रखी थीं। बेटी को खाना परोसते हुए मां ने कहा, “बेटा ससुराल अच्छी लगी? सास-ससुर, दामाद सब ठीक है न?”19 साल की कामिनी जैसे सालों की भूखी हो, इस तरह खाते हुए बोली, “सब ठीक है… पर एक बात कहूं, मां तो मां है।”इतना कह कर वह गरमागरम खाने पर टूट पड़ी।वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए, सेक्टर-12,नोएडा-201301 (उ0प्र0 मो-8368781336virendra4mk@gmail.com

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