ग्राम टुडे ख़ास

मीडिया , सिनेमा ,वेब दुनिया और हिंदी

मंजूरी डेका
हिंदी भाषा की उत्पति , प्रगति और संहति के सम्बन्ध में हजारों हज़ार मत है | लेकिन आज साबित हो गया है कि गद्य और पद्य पर हिंदी में क्रियोलीकरण का असर स्पष्ट दिखता है | जिसका प्रयोग भिन्न साहित्यक विधायों सहित मीडिया, सिनेमा , वेब दुनिया अदि में व्यापक स्तर पर दिखता है | हिंदी अब तो अंतराष्ट्रीय भाषा हो चुकी है तथा चीन की मंदारिन भाषा के बाद विश्व में सर्वाधिक हिंदी भाषा भाषी है | क्योंकि हिंदी एक अत्यंत सहज, सरल एवं बोधगम्य भाषा है जिस कारण इसको समाचार सम्प्रेषण का माध्यम , सिनेमा आदि में संवाद व मनोरंजन की भाषा के रूप में प्रयोग किया जाता है | आज विश्व में प्रायः तीन करोड़ प्रवासी भारतीय आज भी हिंदी से अविदित रूप से जुड़ते है | आज हलीवूड के फिल्म निर्माता भी भारत में अपनी विपणन नीति बदल चुके है | जब सन् २००० में पहला वेबपोर्टल अस्तित्व में आया तभी से इन्टरनेट पर हिंदी ने अपनी छाप छोड़नी प्रारम्भ कर दी | नइ पीडी के साथ-साथ पुरानी पीडी ने भी इसकी उपयोगिता समझ ली है | हिंदी एक एसी भाषा है जिस मे हर प्रकार की सृजनात्मक संक्रियाओं को बाणी देने की क्षमता है | इस डिजिटल युग में हिंदी एक बिंदास भाषा है जो अपने फक्कडपन के बदौलत संघर्षरत है |
संसार में लगभग अट्ठाईस सौ भाषाएँ है जिनमे तेरह ऐसी भाषाएँ है , जिनके बोलने वालों की संख्या साठ कड़ोर से ज्यादा है | संसार की भाषाओं में हिंदी भाषा को चौथा स्थान प्राप्त है| पहला चीन के मंदारिन, इंग्लिश , अरबिक, पोतुगुएस | भारत के बाहर जैसे- बर्मा , मॅारीशस, ट्रिनिडाड , फीजी, मलाया, सुरीनाम, दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका में हिंदी बोले, समझे और पढने वाले काफी लोग हैं | आज हिंदी सिर्फ़ साहित्यिक भाषा न होकर मीडिया का भाषा, सिनेमा का भाषा और वेब दुनिया का भाषा बन चूकी है |
मीडिया : मीडिया का मतलब है ‘मध्यम’ | माध्यम स्रोत और श्रोता को एक दुसरे के साथ जोड़ने वाला है, उनके बीच सम्पर्क स्थापन करने वाला संघटक है और यह हिंदी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है | जनसंचार माध्यम वर्तमान औद्योगिक तथा तकनीकी समाज की देंन है, समचार पत्र रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा तथा कंप्यूटर आदि जनसंचार के अंगभूत माध्यम है | जनमध्यमों का सम्बन्ध जनसंचार से है और ‘जनसंचार’ अपने आप में एक बहुत व्यापक अर्थयुक्त शब्द है | हिंदी भाषा इस माध्यम को सशक्त बना रही है | जनसंचार माध्यमों का दो भागों में विभाक्त कर सकते है –

  1. परम्परागत माध्यम २. आधुनिक माध्यम |
    कीर्तन –कथा प्रवचन , लोक संगीत , रासलीला , रामलीला , कथा-वार्ता , लोक कथा , कठपुटली, नौटंकी , नाच तथा प्रदर्शनी आदि परम्परागत माध्यम है | परम्परागत माध्यम मनुष्य को पीड़ी-दर-पीड़ी उत्तराधिकारी के रूप में मिलते है |
    आधुनिक जनमाध्यम – मुद्रण ( समाचार पत्र ,पोस्टर ,पुस्तकें ), इलेक्ट्रॉनिक माध्यम( रेडिओ, कसेट, टेलीफोन सिनेमा ,टेलेविज़न आदि ) और नव इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (कृतिम उपग्रह, रॅाडर तथा कंप्यूटर) | विकास के विविध क्षेत्रों की तरह जनसंचार के क्षेत्र में भी जबरदस्त विकास हुआ | चुकी इन माध्यमों का व्यव्हार व्यापक रूप से होता हैऔर हिंदी पढ़ने, सुनने ,बोल ने वाले लोग भी ज्यादा है इसी कारण हिंदी को एक प्रबल भाषा के रूप में प्रयोग में लाया जीता है | यही कारण है की हिंदी अंतराष्ट्रीय एकता में सहायक हैं |
    सिनेमा: सिनेमा का आधार छायाचित्रोंको(photographs)गति देना है | इस कला का सर्व प्रथम प्रयोग थामस ऐडिसन ने 1818 में किया था | लेकिन सेल्युलाइड सिनेमा के सार्वजनिक प्रदर्शन का श्रेय फ़्रांस के ल्युमए बंधुओं को प्राप्त है | प्रारम्भ में ये सिनेमा छोटी और मूक होती थी | बाद में इनके साथ संवाद और संगीत का संयोजन किया जाने लगा और सवाक सिनेमा अस्तित्व में आया | इसी तरह ब्लैक एंड वाइटल के बाद सिनेमा रंगीन हो गई| आज सिनेमा तकनीक और कला दोनों की दृष्टि से बोहुत उन्नत और लोक प्रिय जनमाध्यम है |
    १४ मार्च सन १९३१ में भारत में गूंगी सिनेमा ने बोलना सिखा | आर्देशिर ईरानी द्वारा निर्देशित ‘ आलम आरा ’ मुंबई की मैजेस्टिक सिनेमा हॉल में रिलीज़ हुई | सिनेमा मनोरंजन परक , ज्ञान परक होता है | झा तक हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार का प्रश्न है, उसमें सिनेमा का योगदान महत्वपूर्ण है | दुनिया में हालीवुड के बाद भारत का बॅालीवुड सिनेमा उद्योग में प्रथम स्थान रखता है | इसके अतिरिक्त दक्षिण में भी जिसे ‘जॅालीवुड’ खा जता है – मलयालम , अन्नड , तेलुगु और दुसरे तरफ बांग्ला, पंजाबी , गुजरती तथा क्षेत्रीय भाषायों अदि में भी सिनेमा निर्माण होता है, लेकिन 90% सिनेमा हिंदी भाषा की होती है |
    सिनेमा में साधारण बोलचाल की भाषा प्रयोग होती है व्याकरणिक दृष्टी से शुद्ध और भाषाई प्रोग की दृष्टी से चाहे उच्चस्तरीय न हो, लेकिन जन सामान्य में इसकी लोकप्रियता को इंकार नहीं कर सकते | सिनेमा एक सांस्कृतिक उत्पाद होते हुवे भी यह एक बड़ा उद्योग है जिका लक्ष्य मनोर्न्जल देनेके साथ-साथ पैसा कमाना है| हॅालीवूड के फिल्म निर्माता भी भारत में अपनी विपणन नीति बदल चुके है | आज अन्य भाषा की सिनेमाओं में संवाद हिंदी में अनुवाद होता है ताकि इस द्वितीय जनबहुल राष्ट्र के लोग उन सिनेमाओं को समझे देखे और व्यवसायिक रूप से मुनफा कमाए | अज्ज हम उदाहरण के रूप में हल ही में रिलीज हुई सिनेमा दक्षिण के एस.एस. राजामौली के द्वरा निर्देशित बाहुबली की बात कर सकते है | वह मूलतः दक्षिण भारतीय सिनेमा के रूप में बनाया गया था और उसका संवाद तेलुगु, तमिल के साथ –साथ हिंदी में भी दे कर पुरे विश्व में 9000 से भी ज्यादा सिनेमा घरों में रिलीज किया गया उनमे से 6500 से ज्यादा भारतीय सिनेमा घरों में बाकि अन्य स्क्रीन में दिखाया गया और 250 करोड़ में बनाई गई सिनेमा ने अभी तक 2337.32 बिज़नस किया | तो इसी से हम पता लगा है कि हिंदी आज की युग में कितनी शसक्त भाषा है | जो मौकाम इस सिनेमा को अन्य भाष नही दे पायें वही मौकाम हिंदी ने दी | सिनेमा कला की कोई भी विधा हो ,उसका सम्बन्ध सभी स्तरों के लोगों से होता हैं | इसलिए भाषा एक सर्वग्रह्य और सरल रूप का ही प्रयोग होता हैं |
    वेब दुनिया : आज के प्रोद्योगिकी के दौर में मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में एक शक्तिशाली माध्यम के रूपमें उभरा है और उसमें भी न्यू मीडिया यानि वेब मीडिया के प्रति लोगो का आकर्षण प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं , भुमंडलीकरण के दौर में मीडिया का दायरा विस्तृत हो चूका हैं, ऐसे में विभिन्न भाषाओँ का विकास भी वेब मीडिया के तरह ही हो रहा है | आज की स्थिति में वेब और भाषा एक दुसरे के अहम सहोयोगी मने जा सकते है , भारत जैसे विशाल देश में जहाँ व्यापक क्षेत्र में हिंदी बोली जाती है वहाँ इसके विकास में वेब मीडिया के योगदान को नजर अंदाज नहीं कित्य जा सकता है | एह सच है की वेब के असर से हिंदी के स्वरूप में इसके मूल स्वरुप से भिन्नता है | लेकिन यही भिन्नता ही इस विकास की गाडी की पहिये है | एक विस्तृत दायरे साथ हिंदी अपने आप व्यापक है | वेब मीडिया के प्रयोग के बाबजूद हिंदी के अश्तित्व पर कोई संकट नही है | दूसरी भाषओं के कुछ शब्दों के प्रयोग से ही हिंदी वेब के लायक बने अन्यथा अपने मूल स्वरुप में हिंदी एक दयेरे तक सिमित हो कर रह जाते | यूँ तो 80के दशक में हिंदी को कम्पूटर की भाषा बनाने का प्रयास शुरू हो चूका था | परन्तु वेब के साथ हिंदी का प्रयोग २०वी सदी के समप्ती के बाद शुरू हुआ| सन् 2000 में यूनिकोडे के पदार्पण के बाद २००३ में सर्व प्रथम हिंदी में इन्टरनेट सर्च और ईमेल की सुबिधा की सुरुआत हुई | हिंदी की विकाश में यह एक मिल का पत्थर साबित हुआ | 21वीं सदी पहले दशक में ही गूगल न्यूज़, गूगल ट्रांसलेट तथा ओंलिन फोनेटिक टाइपिंग जैसे
    औजरों ने वेब की दुनिया में हिंदी की विकाश में महत्वापूर्ण सहायता की | इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम और कंप्यूटर अदि के प्रयोग में हिंदी ने अपनी जगह बना ली है |इसे एक तरफ इन माध्यमों से हिंदी का प्रचार हो रहा है तो दूसरी तरफ हिंदी का बाज़ार बन रहा है | इसे हिंदी की अन्तःराष्ट्रीय भूमिका मजबूत हो रही है | कुछ हिंदी बातों को ध्यान में रख कर पूर्व अमेरिकी राष्टपति ने कहा था –“ यदि भारत को समझाना है तो हिंदी सीखो” | ‘एग्रीगटर’ से शुरू हुआ ब्लांगिंग का इतिहास बोहुत पुराना नही है अलोक कुमार के ‘नो दो ग्यारह’ नाम के हिंदी के पहले ब्लांग से श्रीगणेश के बाद आज हजारों की संख्या में हिंदी ब्लांग वेब में मोजूद है | अनुवाद को भी इस कारण बढ़ावा मिला है | तकनीकी , वाणिज्यिक , विधिक , प्रशासनिक तथा प्रशासन प्रबंधन आदि साहित्येतर विषयों की सामग्री के अनुवाद में वेब मीडिया सहायक है | इसके सहायता से इ-लर्निंग से अहिन्दी भाषी हिंदी सिख रहे है | इस प्रकार से देखे तो इस तकनीकी युग में हिंदी एक बिंदास भाषा हैं |
    जब किसी समाज में सारे व्यक्ति किसी निर्दिष्ट भौगालिक सीमा के अन्दर अपने पारस्परिक भेद भावों को भुलाकर समूहीकरण की भावना से प्रेरित होते हुए एकता के सुत्रबंध जाते है तो उसे राष्ट्र के नाम से पुकारा जाता है | राष्ट्र को छोड़ कर व्यक्ति का कोई अस्तित्व नही है | राष्ट्रीयता और देशप्रेम की भावना का एक ही अर्थ लगा लिया जाता है परन्तु यह उचित नही है| देश प्रेम की भावना तो प्राचीन कल से ही पी जाती है किन्तु राष्ट्रीयता की भावना का जन्म केवल 18 वीं शताब्दी में फ्रांच की महान क्रांति के पश्र्चात ही हुआ | राष्ट्रय एकता का अर्थ केवल अपने राज्य के प्रति प्रेम भाव रखना ही नही है अपितु इसका अभिप्राय राज्य तथा इसके भाषा , संस्कृति , धर्म ,इतिहास में भी पूर्ण श्रध्दा रखना |
    भाषा मानव समाज की अप्रतिम उपलब्धि है | भाषा भावों विचारों की अभिव्यक्ति अथवा भाव सम्प्रेषण का सर्वसुलभ एवं सशक्त साधन है | तात्विकरूप से भाषा ध्वनि प्रतीकों की एक व्यव्स्था है जिसके माध्यम से मानव समुह अपनी विचार-विनिमय करता है | भाषा ही किसी भी देश की सच्ची पहचान , उस देश की संस्कृति की संवाहिका होती है | ऋग्वेद में ऋचा , सरस्वती , मही त्रिस्त्रोदेविमयो भुवः की द्वारा भाषा , संस्कृति एवं राष्ट्र के नागरिकों की भावात्मक एकता एवं सांस्कृतिक चेतना का मूल आधार भाषा है |
    हिंदी भारत की सबसे ज्यादा बोले ,सुने समझने वाले भाषा के रूप में जाने जाते है| 14 सितम्बर सन 1949 को हिंदी को इस बहुभाषी राष्ट्र का राष्ट्रभाषा के रूप में और जनवरी 26 सन 1950 में संविधान के 343(1) के तहत राजभाषा का दर्जा दिया गया |हिंदी वर्षों से हमारे संस्कृतिक विरासत एवं साहित्य की भाषा के साथ-साथ जनता की सम्पर्क भाषा के रूप में प्रचलित रही है | संस्कृत ,पली ,प्राकृत अदि अनेक भाषाओँ को इसने आत्मसात किया है | कह सकते है की यह हमारी संस्कृत की येष्ठ पुत्री एवं उत्रधिकरिणी तथा समाजिक संस्कृति के सभी ततवों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम रही है | जो कम पहले संस्कृत ने किया आज वही कम हिंदी कर रही है | आज हमारे संस्कृति के वाहक ग्रन्थ गीता ,रामायण , महाभारत की टीकाएँ ,वेद , उपनिषद् ,स्मृतियों आदि हिंदी में उपलब्ध है | ज्ञान एवं संस्कृति के अक्षय भंडार संस्कृत में था वह आज हिंदी में है | आज हिंदी के भक्ति काल के महान कवियों जेसे – सूरदास तुलसीदस ,मीरा ,कबीरदास , रहीम तथा संत समाज ने भारतीय में अपूरित कर दिया है |
    भारत एक बहुरंगी देश है | यहाँ भाति-भाति के मौसम, भाति-भाति की भाषा, भाति-भाति की खान-पान ,वस्त्र देखने को मिलती है ; इसी कारण यहाँ सांस्कृतिक भिन्नता भी बढ़-चढ़ कर बोलती है | कश्मीर से कन्याकुमारी तक न जाने कितनी ही लोकगीत, संस्कार और लोककथाएं है जो किसी परम्परा का, किसी जाति का अपनी जीवन शेली और सांस्कृति का धरोहर है | सदियों पहले से विकसित कला और साहित्य में हमारी संस्कृति का झलक दिखाई देती है | कियोंकि हिंदी एक अत्यंत सरल भाषा है जिस कारण सभी शिक्षित और अशिक्षित व्यक्ति पढ़कर या फिर सुनकर बृहत् भारतवर्ष के बारे में जान सकते हैं | आज पश्चमी देश हमारे आगे नतमस्तक है , अमेरिका और यूरोप के लोग भारतीय जीवन पद्धति को अपना रहे है | आज भारत के बाहर भी हिंदी बोलने जाने वाले लोगों की संख्या में बढोती हो रही है बस इसकी सरल-सहज गुणों के करण ही | एक माँ की तरह इसने हर देशी-विदेशी भाषाओँ की शब्दों को ग्रहण किया है और हमारी राष्ट्रिय सांस्कृतिक एकता में हमेशा से अपनी योगदान देते आ रहे है |
    उन्नीसवीं सदी में भारतीय पुनर्जागरण के पुरोधा महामानव दयाननंद सरस्वती ने वेदभाष्य हिंदी में किये तथा अपनी महान ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश हिंदी में किया | हिंदी हिन्दू ,मुसलमान, सिख, इसाई सभी करते है | इसने ब्रज, उर्दू, फारसी, अवधी, मागधी, शोरसेनी अदि को आत्मसात कर यह भाषा समुच्चय बन गई है | आमिर खुसरो, जायसी, रसखान अदि सूफी संतों ने हिंदी में काव्य किये | अहिन्दी भाषी क्षेत्र के अनेक मनीषियों ने राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी को अपनाया | स्वतंत्रता आन्दोलन के समय न जाने कितने ही हिंदी में देशप्रेम मूलक गीत रचे , गए गए | हिंदी के जन्मदाता माने जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद ने हिंदी के बारे में कहा था – निज भाषा उन्नति हेतु आहे सब उन्नति को मूल | बिन निज भाषा ज्ञान के मिटे न हिय को सूल | दक्षिण और उत्तर भारत की शेली को मिलाकर भारत में लगभग 250 राग है | रविशंकर जेसे महँ संगीतज्ञ ने भारतीय संगीत द्वारा पूर्व और पश्चिम के संगीत के बीच सेतु निर्माण किया है | भारतीय सांस्कृतिक एकता का अन्य एक कारण है हिंदी भाषा में हर कला का दर्शन होना | इस भाषा में हर कला की पुस्तके उपलब्ध है |
    एक देश तभी सभी क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है जब वहा के लोग शिक्षित हो | ख़ुशी की बात तो यह है कि आज प्राय सभी स्कूलों , कालेजों , विश्वविद्यालयों में हिंदी में पाठ्यक्रम प्रारम्भ हो गया है | इस भाषा में लिखित इतिहास, साहित्य, अनान्य शास्त्रों से आने वाली नई पीढ़ी को देश की सांस्कृतिक अवधारणा का सम्यक ज्ञान दे सकते है और इसी से ही अपनी मातृभूमि के प्रति देशप्रेम और राष्ट्रीयता की भावना जगा सकते है ; और यह एकता का कम हिंदी ही कर सकते है |
    कहा जाता है कि – जहाँ भाषा, भाव , भावना में एकता आ जाए वह सागर में नदियों की भाती सरे सुख एक-एक करके प्रवेश करने लगते है | अतः हमे अपनी संविधान सम्मत सभी भाषायों का पूर्ण सम्मान करते हुए रास्ट्रीय भावना और एकता को परिपुष्ट करने के लिए राजभाषा हिंदी को उसके पद पर सही अर्थों में निष्ठा पुर्वक स्थापित करने का संकल्प करना चाहिए |

मंजूरी डेका, शिक्षिका
विश्वनाथ, असम

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