ग्राम टुडे ख़ास

मेरा हृदय उद्गार

!!रावण कहता है !!

गिरिराज पांडे

हे राम प्रिय हमारे लंका में अब पधारो
करके विनाश निषिचर हमको भी अब तो तारों
भटकता फिरू में कब तक निश्चर की योनि में ही
जो मिला है साप मुनि का उससे मुझे उबारो
हे राम प्रिय हमारे
अवतार लेकर आए प्रभु राम तुम यहां पर
पूजे ये दुनिया सारी तुझको ही अब यहां पर
उद्धार करके मेरा शिव से मुझे मिलाओ
हे राम प्रिय हमारे
स्थापना जो शिव की हमने यहां कराई
आशीष देके तुझको तेरी राह सुगम बनाई
करके विजय यहां पर दुनिया को तुम दिखाओ
हे राम प्रिय हमारे
ना संदेह हो किसी को भगवान पर तुम्हारे
कामों को तेरे देखें अब तो यह दुनिया सारी
जीवन में जो भी होगा पथभ्रष्ट अब यहां पर
ऐसा ही हाल होगा सबको यहां बताओ
हे राम प्रिय हमारे
आरोप मुझ पर गढते सीता हरी है मैंने
साधु का रूप धरकर सीता छली है मैने
माता है वह हमारी हम यह भी जानते हैं
रखी पवित्र सीता ले लो परीक्षा चाहो
हे राम प्रिय हमारे
बैठा हूं कब से तेरी ही राह देखता मै
आकर के अब तो मुझको अपना दरस दिखाओ
उद्धार करके जीवन पावन करो हमारा
पापों का नाश करके मुझे अपने में मिला लो
हे राम प्रिय हमारे

गिरिराज पांडे
वीरमऊ
प्रतापगढ़!!

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