ग्राम टुडे ख़ास

मैं झूठ हूं

आराधना

मैं झूठ हूँ !
कहने को तो झूठ
पर सोचो,तो हूँ सच !

सच,सच,हाँ सच-
होता है सुंदर,
दर्शित होता सत्य का
स्वर्ण-मुकुट पहनकर,
स्वच्छ,सुन्दर,आकर्षक
पर अक्सर होता है झूठ !

कौन सच और कौन है झूठ ??
आज का सच
होगा कल का झूठ!
और आज का झूठ
हो जाएगा कल का सच !

झूठ इतराए भी क्यूँ ना,
अदृश्य होकर भी सवार रहता सदा,
सत्य को बौना कर उसके ऊपर,
प्रथम- सा,अव्वल-सा!

सच बेचारा भोला,
देख नहीं पाता उसे और
चतुर झूठ बैठा रहता,
कुंडली मारे सदा साथ-साथ,
सच बनकर!

झूठ-सच का तानाबाना बुनती ज़िंदगी,
एक तमाशा ही तो है
जीवन के रंगमंच पर,
बहुरूपिया बने, ढोंग रचते,
तरह-तरह केकिरदार निभाते,
हम सब कलाकार!

चलो पूछें दिल से,
कुछ टटोलें,टोह लें,थाह लें,
आखिर दृश्य सच झूठ है या अदृश्य झूठ ही है सच!!

  • आराधना
  • पटना
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