ग्राम टुडे ख़ाससाहित्य

रहें आरोग्य

मधु वैष्णव ‘मान्या’


मधु,रहेंआरोग्य हम,
जलाते रहे संवेदनाओं के ,
दीप सभी ।
रिश्तों की रेशमी डोर से,
कोई खेले ना कभी ।
जलता रहे दीप उम्मीदों का,
चलता रहे कारवां मंजिल का,
जीवन से ना ,
कोई हारे कभी।
हर कोना रोशन हो ,
अभिलाषाओं का ,
प्रीत का तटबंध,
ना तोड़े कोई कभी।
दौर कठिनाइयों का ,
निकालते रहें
मुस्कान की छांव में,
हम सभी।
मधु वैष्णव ‘मान्या’
विधा मुक्त स्वरचित मौलिक रचना,जोधपुर, राजस्थान

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