ग्राम टुडे ख़ास

रिश्ते की डोर

कुन्दन कुमारी

रिश्ते की डोर जब पड़ जाए कमजोर।
जरूरी है चुप्पी कभी नहीं मचाना शोर।।
लहलहाते पेड़ को देख खुश हो जाते हैं,
जतन से पेड़ लगाने वाले
भरते उड़ान देख मंद- मंद मुस्काते हैं
शौक से पंख लगाने वाले
हमेशा ही हौसला बढ़ाते ही रहते हैं
बड़े-बड़े सपने दिखाने वाले
पर रिश्ते और सियासत में हो जाये गठजोड़ ।
तब जरूरी है चुप्पी कभी नहीं मचाना शोर ।।
किसी को पा नहीं सकते रोने से
खोने से किसी को भुला नहीं सकते
जब सुख और दुख बयां हो नहीं पाये जुबां से
खुशी का जीवन कैसे जी सकते
अभिव्यक्ति की आजादी पर भी चर्चा हो पुरजोर।
तब जरूरी है चुप्पी कभी नहीं मचाना शोर। ।
जो धैर्यवान है उसी का वर्तमान है
आदमी कुछ भी नहीं समय बलवान है
पहले अपनी जिंदगी तब पूरा जहान है
उड़ने के लिए तो खुला आसमान है
जब कोमल दिल भी हो जाए बहुत कठोर।
तब जरूरी है चुप्पी कभी नहीं मचाना शोर
जब रिश्ते की डोर हो जाए कमजोर। । ।

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!