ग्राम टुडे ख़ास

रेखा गुप्ता की कलम से

प्यार

एक मधुर अनुभूति,
एक अदभुत एहसास हूँ मैं ,
शरीर में गूंजता मधुर संगीत हूँ मैं ,
कोई रंग रूप आकार नहीं, फिर भी –
दुनिया में सबसे सुंदर और अनमोल हूँ मैं ,
तितली के पंखो सा कोमल ,
चट्टान की तरह अडिग हूँ मैं ,
आकाश से भी ऊँचा एक ,
अनुपम आकर्षण हूँ मैं ,
समय की सरगम पर बजता ,
खुशनुमा गीत हूँ मैं ,
कब कहाँ और किसके ,
दिल में मैं बस जाऊँ ,
ऐसा एक रहस्य हूँ मैं ,
सम्मोहन और रोमांच का,
एक अदभुत एहसास हूँ मैं,
किसी के दिल में बसने की ,
एक निरन्तर कोशिश हूँ मैं,
हर दिल में बसता प्यार हूँ मैं,
हाँ, हर दिल में बसता प्यार हूँ मैं ।

संवेदना

तुम संवेदना हो न?
कहां रहती हो आजकल?
पहले तो हर दिल में तुम
अपने होने का एहसास कराती थीं ,
अजनबी से मिलने पर भी,
अपनेपन का अनुभव कराती थीं,
प्रेम में सच्चाई पवित्रता होती थी,
किसी के दर्द में तुम्हारी आखें भी,
अश्रुपूरित होती थीं,
किसी की खामोशी को भी,
पढने का हुनर रखती थीं
दिलो में बस प्रेम ही पलता था,
ईर्ष्या द्वेष तो बस नाममात्र को था,
अत्याचार, दुराचार के विरूद्ध ,
आवाज बुलंद करती थीं,
मानव को मानवता का पाठ,
सहज ही सिखाती थीं ,
शायद आज तुम (संवेदना )
मानव मन में बर्फ की तरह,
भीतर कहीं जम कर रह गई हो,
समाज में हो रहे,
अत्याचार,दुराचार को देखकर भी ,
किसी का दिल नहीं पसीजता है,
और अगर दिल में,
कुछ हलचल होती भी है,
तो मात्र अपने फायदे के लिए ,
शायद तुम ही हो (संवेदना)
शायद नहीं, एकमात्र तुम ही हो ,
लोगो के दिल में फिर से बसकर,
समाज में हो रही उथल-पुथल को ,
शांत कर सकती हो,
भावविहीन समाज में, फिर से
वही प्रेम, दया,आदर सम्मान के
भाव जागृत कर सकती हो ,
हाँ, बस तुम ही कर सकती हो।

          रेखा गुप्ता 
            नोएडा
100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!