ग्राम टुडे ख़ास

रोपनी गीत:::हुड़ुका

अमरेन्द्र कुमार सिंह

पोरे पोरे बथेला बदनिया ए बालम।
हमसे नाही होई अब रोपनिया ए बालम।

झर झर बुनी परे पुरूब के सिवान में-
ठेहुना भर पानी बा कियारिया ए बालम।

बिचड़ा ना लउके रामा डूबल पतर पुलुंगी-
कादो कीचड़ भरल बा डहरिया ए बालम।

छिंटे माटी आँटी साथे देवरा अबाटी बाटे-
देही के लेटावेला चुनरिया ए बालम।

भीजि जाई साया साड़ी कहवाँ सूखाइबि-
चूअत बाटे बुनी से पलनिया ए बालम।

हमके बचाईं पिया खासीँ जर जुकाम से-
माथे प ओढ़ाई द ओढ़निया ए बालम।

तनिको भ सवँस नइखे हमरा चुहानी से-
गोदी में के रोयेले बबुनिया ए बालम।

अमरेन्द्र कुमार सिंह
आरा भोजपुर बिहार

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