ग्राम टुडे ख़ास

लोकतंत्र

आभा सिंह

नहीं मानती मैं ऐसे लोकतंत्र को जहाँ मानवीय
संवेदनाओं पर होता नित निर्मम प्रहार है
जहाँ हर रोज कोई भूखा सोता है
जहाँ हर रोज चीर हरण होता है
शीश कटता है हमारे वीर जवानों का
वृक्ष से धड़ लटकता है कर्ज में डूबे किसानों का
जहाँ लूटा जाता है इस धरा के खजानों को
हर कोई बाँटता फिरता है भजनों और अजानों को
अपने हैं तन -मन – धन से सम्पन्न बनकर
वोट के नाम पर बस लूट रहे जनता को
बेरोजगार हर युवा यहाँ झेल रहा तानों को
चाहती हूँ मैं ऐसा लोकतंत्र अपने देश का जहाँ सबको रोटी,कपड़ा,मकान ,शिक्षा व रोजगार हो
हर बेटे – बेटी का समान अधिकार हो
कोई ना छीने हक जनता का
थर -थर काँपता भ्रष्टाचार हो
जहाँ हर बेटी ,औरत सुरक्षित हो
कभी ना शोषण,बलात्कार हो
भारत फिर से बने सोने की चिड़िया
अश्वमेघ हो फिर विश्वपटल पर
विश्वगुरू फिर से कहलाये देश मेरा
हो न्याय जहाँ चारों तरफ खुशियों का लोकतंत्र हो !!
आभा सिंह
लखनऊ उत्तर प्रदेश

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