ग्राम टुडे ख़ास

विधवा पुनर्विवाह


विक्रांत राजपूत चम्बली

आओ मिलकर कदम बढ़ाए नारी के सम्मान में।
विधवा विवाह शुरू करें महिला के उत्थान में।।

सारे अपने छोड़ आई तब एक आसरा उसने पाया।
नियति का खेल उससे जीवन साथी छीन लाया।।

अब पड़ी असहाय बताओ जिए किसके सहारे।
इस नियति के खेल अनोखे होते एकदम न्यारे।।

आओ उसको नवजीवन दें एक नई पहचान में।
विधवा विवाह शुरू करें महिला के उत्थान में।।

हरपल अकेली यही सोचे कैसे जीवन बीतेगा।
मेरे इस उपवन रूपी जीवन को कौन सींचेगा।।

अब किसका मै हाथ पकड़ कर गर्वित हो पाऊंगी।
जीवन रूपी पथ पर आगे किसके साथ जाऊंगी।।

आओ उसको राह दिखाएं सब के तत्वधान में।
विधवा विवाह शुरू करें महिला के सम्मान में।।

वह किसी के घर की बिटिया आंगन की उजियारी।
उसके सीने में भी दिल है वह भी अपनों की प्यारी।।

वह फिर से सपने देखे क्या उसको अधिकार नहीं।
समाज में घुट कर जिए क्या उसका तिरस्कार नहीं।।

चलो एक आगाज करें हम नारी के सम्मान में।
विधवा विवाह शुरू करें महिला के उत्थान में।।

नाम – विक्रांत राजपूत चम्बली
पता – ग्वालियर (मध्य प्रदेश)
ईमेल पता – ndlodhi2@yahoo.com

© स्वरचित रचना एवं
सर्वाधिकार सुरक्षित

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