ग्राम टुडे ख़ास

विश्व पर्यावरण दिवस पर

विद्या भूषण मिश्र “भूषण”

बरसतीं अकाश से चिंगारियाँ, 
तप्त है धरती तवा सी जल रही, 
स्वेद से है स्नान मानव कर रहा,
आग जैसी गर्म लू क्यों चल रही?
🌿🌿🌿
मच रहा चहुँ और पानी के लिए, 
शोर क्यों? सबलोग क्यों बेहाल हैं?
काॅंप उठती रोज अब क्यों यह धरा,
नित्य आता है यहाँ भूकम्प क्यों?
🌿🌿🌿
हो रही अतिवृष्टि, बादल फट रहे, 
लोग मरते तड़ित  गिरने से कहीं,
बाढ़ में घर,खेत,पशु सब बह रहे,
जल-प्रलय से हैं सभी भयभीत क्यों?
🌿🌿🌿
सूख जाती है फसल हर साल क्यों?
हो रहीं नदियाॅं मरुस्थल सूख कर,
मर रहे हैं लोग भोजन के बिना, 
जंगलों का मिट गया अस्तित्व क्यों?
🌿🌿🌿
पर्वतों से छीजते  पत्थर कहीं,
भूस्खलन की हो रहीं आवृत्तियाँ,
लग रही है जंगलों  में आग भी,
घट रहा भूगर्भ जल हर साल क्यों? 
🌿🌿🌿
मानवों ने है किया  शोषण सदा,
प्रकृति का अपमान निज दुर्वृत्ति से,
काट डाले पेड़, पर्वत,वन-विजन,
यह उसी दुष्कर्म का परिणाम है!! 
🌿🌿🌿
वक्त है अब भी सम्भल जाओ, करो,
प्रकृति का सम्मान, तो बच जाओगे,
पेड़ रोपो,पर्वतों   को छेड़ना,
बन्द कर दोगे तभी जी पाओगे!!
🌿🌿🌿
शुद्ध हो पर्यावरण  सर्वत्र ही,
वायु-जल हों शुद्ध,भोजन शुद्ध हो,
स्वस्थ हों सब जीव-जंतु,मनुष्य,वन,
प्राणियों का विश्व के कल्याण हो!!
🌿🌿🌿

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