ग्राम टुडे ख़ास

वेषभूषा का हम पर प्रभाव…

डॉ रमाकांत क्षितिज

किसी भी सेना के जवानों को यदि पेंट शर्ट और अन्य समान न पहनाकर और कुछ पहना दिया जाय,तो उनमें वह जोश नही होगा,जो सैनिक की वर्दी से आता है।जब हम कोई नया कपड़ा पहनते है,तब उस दिन हमें कुछ अलग अवश्य ही महसूस होता है। इसी तरह कसे टाइट कपडों का और ढीले ढाले कपड़ों का भी हमारे स्वभाव पर फर्क पड़ता है। यह भी कह सकते है कि,हमारी सोच,स्थान से भी हमारा पहनावा प्रभावित होता है। उत्तेजन में काम करते समय टाइट कपड़े पहनना हम पसन्द करते है।

इसी तरह शांति के समय रिलैक्स के समय ढीले कपड़े पहनना हम पसन्द करते है। सैनिक और वे सभी काम जिसमें चुस्ती फुर्ती की ज़रूरत होती है,उस समय टाइट कपड़े ही हम पहनते है,अर्थात पहनना पसंद करते हैं।कभी कभी जब हम टाइट पेंट पहने हो,जूते कसे हो,तब हम किसी भी सीढ़ी को दो दो,तीन तीन एक बार में चढ़ने की कोशिश करते है। जबकि इसके विपरीत ढीले ढाले कपडे पहनने पर हम ऐसा नही करते।शरीर से काम करने वाले,टाइट कपड़े पहनते है।यह भी कह सकते है,उन्हें वही पहनाया जाता है।ठीक इसके विपरीत जो लोग शारीरिक कम,बौद्धिक काम ज़्यादा करते है,वे ढीले ढाले कपड़े ही पहनना पसंद करते हैं। यह भी कह सकते है,उन्हें पहनाया जाता है।

ज़्यादातर धर्म गुरु,दार्शनिक किसी भी धर्म को मानने वाले हो,सभी ढीले कपड़े ही पहनते है।मन्दिर के पुजारी,मस्जिद के मौलवी,चर्च के फ़ादर, गुरुद्वारे के ग्रन्थी लगभग सभी ढीले कपड़े ही पहनते है।बड़े बड़े दार्शनिक महान संत सभी इसी श्रेणी में आते है,अपवाद तो सब का होता है,इसका भी होगा ही। ज़्यादा कामुक और झगड़ालू लोग भी टाइट कपड़े ही पहनना पसंद करते हैं। इसके विपरीत शांत स्वभाव के लोग ढीले कपड़े पहनना पसंद करते हैं।पुराने और नए कपड़ों तक का हम पर प्रभाव पड़ता है। कभी हम जब नया सिर्फ अंडरविअर भी पहन लें ,तब भी हम थोड़ा अलग महसूस करते ही हैं,एनर्जेटिक महसूस करते हैं।इसी तरह नया कपड़ा पहनने पर तो,थोड़ा अलग प्रसन्नचित लगते ही हैं।

इसी तरह रंगों का प्रभाव भी हमारे ऊपर पड़ता ही है।हर रंग का अलग अलग प्रभाव हमारे हावभाव से लेकर विचारों तक पर पड़ता ही है।स्वभाव और काल से प्रभावित होकर हम सब अपनी पसंद बनाते हैं,या यूं कहें बन जाती है।यह सब सामान्य मनुष्यों के लिए है,विशेष व्यक्तित्व पर कभी कभी यह सब लागू नही होगा। जिन पर यह स्वाभाविक न लगे ,वे स्वयं को विशिष्ट व्यक्ति ही माने।

संकलन

विनोद कुमार सीताराम दुबे
संस्थापक

सीताराम ग्रामीण साहित्य परिषद एवं इंद्रजीत पुस्तकालय

जुडपुर रामनगर विधमौवा मड़ियाहूं जौनपुर उत्तर प्रदेश

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