ग्राम टुडे ख़ास

शब्दों का जाल

ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम

शब्दों का जाल जलेबी सा होता है।
अपने अंदर भावों का समुंदर रखता है।।

कोई शब्द मानव को अमृत सा है लगता
तो कोई शब्द तीर सा बन घाव है करता।
कभी कोई शब्द प्रेम का दीप है जलाता,
तो कोई शब्द विरह का कारण बन जाता।

शब्दों का जाल जलेबी सा होता है।
अपने अंदर भावों का समुंदर रखता है।।

कोई कोई शब्द संघर्ष का कारण बनता,
तो कोई शब्द प्यार की धारा में मिलता,
कोई शब्द ज्ञान की पावन गंगा बहाता,
तो कोई शब्द साहित्य शान है मिटाता।

शब्दों का जाल जलेबी सा होता है।
अपने अंदर भावों का समुंदर रखता है।।

ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम
तिलसहरी, कानपुर नगर

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