ग्राम टुडे ख़ास

संजीव ठाकुर अंतरराष्ट्रीय कवि की रचनाएं

संजीव-नी

छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती,

छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती,
छोटी बात पर,फटकार अच्छी नहीं होती,
अफवाहों की दीवार पक्की नहीं होती।

घर है तो दीवारें लाज़मी होगी ही,
दिलों में दीवार अच्छी नहीं होती।।

फरेबी किसका सगा हुआ आज तक,
उसकी कोई गुहार सच्ची नहीं होती।

सादा, सच्चे,मासूम है जो लोग।
उनसे तकरार अच्छी नहीं होती।।

एक बार रूठे को सलीके से मनाइये,
बार बार मनुहार अच्छी नहीं होती।।

राम ने भी रावण का वध किया,
टपकती लार हर नार पर अच्छी नहीं होती.

पंख लागकर उड़ने दो उन्हें आकाश में,
नसीहत की बौछार अच्छी नही होती,

गर्म बयार बह रही शहर में अब,
महफूज घर की,कच्ची दीवार नही
होती,

संजीव नी

आईने की तरह साफ है उनका गुरूर,

आईने की तरह साफ है उनका गुरूर,
कांच की तरह चकनाचूर हुआ मेरा सुरुर।

रोज उग आता,चेहरे पर नया चेहरा ।
कैसे यकीन करें वाकये का हुजूर।

कांपते होंठ, अधखुलीं पलकें है।
खौफ या यौवन,इश्क का फितूर ।।

क्यों हम सब पत्थर के बुत हो गए ।
प्रतिध्वनि का स्वर लौट कर है, आता जरूर।।

बड़े बड़े राजे महाराजे मिट गए ।
फिर माथे पर क्यों इतना गुरुर।।

सर उठा कर विनती करता है वो।
याचक नहीं शोषक होगा जरूर।

संजीव ठाकुर कवि
चौबे कॉलोनी रायपुर,
9009 415 415
wt,62664 19992

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