ग्राम टुडे ख़ास

सरकार से ज्यादा जन प्रतिनिधियों से है नाराजगी

स्थानीय मुद्दे,खनन,व प्रतिनिधियो का व्यवहार मुख्य कारण

गोविन्द कुमार गुप्ता

उत्तर प्रदेश में फरवरी मार्च तक चुनाव सम्भावित है योगी सरकार की अग्निपरीक्षा की तरह है यूं तो योगी सरकार ताबड़तोड़ फैसलों के कारण चर्चित रही पर उन्ही घोषणाओं के क्रियान्वयन में लावरवाही भी बहुत किरकिरी करा रही है,नित्य एक नया आदेश अधिकारियों को कभी रास नही आया और योजनाओं के क्रियान्वयन में भृष्टाचार प्रमुख मुद्दा है,
आवास योजना में दलाली और उचित व्यक्तियों तक आवास योजना का लाभ न पहुंचने से उन गरीबों में आक्रोश है जो रिश्वत नही दे सकते जिसके कारण वह बंचित है योजनाओं से ,गावो में प्रधानों द्वारा भी खुद के वोट बैंक को ही लाभ देने से भाजपा समर्थकों में निराशा व्याप्त है,स्थानीय जनप्रतिनिधि जनसेवा की जगह आय के स्रोत ही ढूढते रहे जिनमे खनन प्रमुख रूप से है एक तरफ प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना से नदियों को बचाने का प्रयास कर रहे है तो दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि खनन करवा कर नदियो को ही खत्म कर रहे है,हालांकि सरकार की बुराई कम दिख रही है पर जन प्रतिनिधि खलनायक बन रहे है ,दूसरे दलों से आये प्रतिनिधि अपने आचरण को बदल नही पाये है,और कही भी अनुशासन नही दिखता,दूसरी और सांसद, बिधायक,जिलापंचायत,सन्गठन, सब खेमो में विभाजित होकर एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे है,इससे सत्तारूढ़ दल को बड़े नुकसान की आशंका है ,
दूसरी और खुले में गोवंश भी ग्रामीणों ही नही शहरी लोगो मे भी नाराजगी का कारण है ,जिनके कारण फसल के साथ कई घरों के चिराग बुझ गये,सरकार हिंदुत्व कार्ड खेलकर चुनाव में जाना चाहती है,विकास भी प्रमुख मुद्दा है,पर नाराजगी को वोट में बदलने हेतु धरातल पर कार्य करने होंगे ,अच्छे लोगो को टिकिट देने होंगे,
विपक्ष कमजोर दिख रहा है पर नाराजगी से खेल बिगड़ सकता है समाजवादी पार्टी एक विकल्प बन सकती है परन्तु उसकी एक धर्म विशेष के प्रति झुकाव नुकसान का कारण है,जिससे दूसरे धर्म के लोग जुड़ना पसन्द नही करते ,सिर्फ अखिलेश की जाति के लोग या कुछ और जातियों का गणित उनके पास है,बिखरा बिपक्ष हमेशा भाजपा के लिये लाभकारी रहा है,
प्रधानमंत्री जी की छवि आज भी भाजपा के लिये संजीवनी है योगी की आक्रामकता युवाओ को पसन्द है,
फिलहाल चुनाब आते ही योजनाओं की घोषणा लोकार्पण शुरू है कितना लाभ मिलेगा यह वक्त बतायेगा फिलहाल कही गठबंधन सरकारों का चलन फिर से न शुरू हो जाये यह आशंका प्रबल है,

गोविन्द कुमार गुप्ता,
मोहम्मदी लखीमपुरखीरी उत्तर प्रदेश

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