ग्राम टुडे ख़ास

सावन की पहली बरसात

मंजूमानस

सावन की पहली बरसात प्रियवर मेरे आ जाना ।
हाथों में थामें हाथ मेरा ,सपने मेरे पूरे कर जाना ।।

बागों की डाली पे ,मेरे लिये ,झूला तुम सजा जाना ।
अपने हाथों से दिलवर मेरे झूला तुम झूला जाना ।।

हरि चूड़ियाँ ,हरी साड़ियाँ ,मेंहँदी लगा मैंने खुद श्रृंगार किया।
हरा है उपवन, हरा है धरती, हरा हो गया मेरा मन ।।

पीहर मैं ना जाऊँगी ,तुम संग सावन के गीत ही गाऊँगी ।
मेरे दिल मे प्यार बनकर सावन की बारिश बरसा जाना ।।

हरे रंग में रंग गई ,मैं तो सजन, हरियाली से प्यार बरसा जाना ।
अपने मीठे स्वर में तुम सावन के गीत सुना जाना ।।

पास आकर मेरे मन को धड़कन अपनी बना जाना ।
कँही ये सावन चला न जाये ,अपनें प्यार से मुझको महका जाना ।।

धरती की हरियाली देख मन मेरा हर्षित कर जाना ।
मेरे संग प्रीत का नाता जोड़ मानस को महका जाना ।।

भिंगते लव, भिंगती धरा, भिंगते उपवन सबकुछ भिंगो जाना ।
अपने प्यार भरी फुहारों से मन मेरा हर्षित कर जाना ।।

कुमारी मंजू मानस
स्वरचित सर्वाधिकर सुरक्षित

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