ग्राम टुडे ख़ास

साहित्यिक परिचय : कुंदन कुमारी


नाम -कुन्दन कुमारी
पिता का नाम-स्व०बनवारी पाठक
माता का नाम-स्व०पार्वती देवी
जन्म स्थान-बसौनी, लक्खीसराय,
बिहार
जन्मतिथि-17-02 -1966
शैक्षणिक योग्यता-एम ए, एल एल बी
पति का नाम-सुनील कुमार झा
ग्राम+पोस्ट-मंझौल
थाना -चेरिया बरियारपुर
जिला-बेगूसराय
बिहार
पेशा-समाजिक कार्य, वकालत
रचना प्रकाशन-सुबह की धूप पत्रिका
झारखण्ड
एजुकेशनल न्यूज़ पटना
The GramToday
साहित्यक उपलब्धि-कोरोनाकाल से
साहित्यक कार्य में
समर्पित

वटसावित्री


जब -जब बट सावित्री पर्व आती।
पतिवंती के मन में उमंग भर जाती।।
कहीं पर लहठी कहीं पर साड़ी,
कहीं पे बोहनी तो कहीं सुपारी,
कहीं पर पंखा खरीद रही नारी ।
जब-जब………………………. ।।
चली है साथ में गाती सखियां,
काजल को भर ली है अखियां,
पूरे मांग भर सिंदूर देखो भरती ।
जब -जब…………………….. ।।
पूरी पकवान ,लड्डू और खाजा,
लीची आम से भर लिए हैं डाला,
प्राणेश के उम्र की कामना करती ।
जब जब. ……….. ……………. ।।
पर छिपा है इसमें विज्ञान का राज,
पेड़ की जड़ में जल भर देते आज,
बरगद पेड़ से उत्तम औषधि बनती ।
जब -जब वट सावित्री पर्व आती। ।
पतिवंती के मन में उमंग भर जाती।।।

“कहीं देर ना हो जाए”


नजरें बार-बार चाहती है दीदार उनका करना,
जिनके बिछड़े एक मुद्दत सी हो गई है,
स्नेहिल दिल स्थिर हो गई है,
निनाद भी गुम हो गई है जेहन से,
फिर भी इंतजार आज भी है,
अंदेशा है कहीं देर ना हो जाए ।
भरोसा बनने में जितना समय लगता है शायद,
कहीं ज्यादा समय लगता है भरोसा टूटने में,
एक रंग में तो कई रंग छुपे होते हैं ,
पर हर रंग अनुकरणीय नहीं होता।
संदेह करना कहीं से बुरी बात नहीं है,
लेकिन संदेह कि भी सीमा होती है,
कैसे जी पाएंगे लोग अपनी जिन्दगी,
जब हवा पानी पर भी संदेह करने लगेंगे,
आपके ही बताए राह पर चल मैं रही थी ,
आपके उम्मीद से कहीं भी ना अलग थी,
उम्मीद पर जो भी खड़ा होता है।
सच्चा सहचर तो वही होता है ।।
कुंदन कुमारी
बेगूसराय, बिहार

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