ग्राम टुडे ख़ास

सिर्फ एक पल

कुमारीमंजूमानस

मुझे सिर्फ वो पल दे दो
चाहे तो इसके बदले मुझसे
मेरी बदले मेरी दुनियाँ ले लो
जिसमें मेरी मां की हाथों की
मीठी रोटियाँ थी
जिसमे उसके हाथों का स्पर्श था जिसमें उसके हाथो से बनी मेरी चोटियाँ थी
जँहा उसकी गोद मे मेरी दुनियाँ थी

मुझे वो मेरा पल दे दो
जिसमे मेरे पापा की हाथों में मेरी उँगलियाँ थी
राह चलते मेरे सामानों की लिस्ट मेरे सपने थे
ठेले पर बेचता छेने का खुरमा जिसमे वो मिठास थी
मेरे पापा के लाये नेपाल से वो मेरी गुड़ियाँ मेरे कानों की झुमकी थी
मेरी हर जिद्द की लिस्ट मेरी हर विश का पुर्जा था
जिसमे वो अम्बर से हाथ फैलाये मेरे हर सपनो की विश पुरी करने वाले मेरी जिंदगी थी
कभी न मारने वाले मेरी दुनियाँ थी

मुझे मेरे जिंदगी के वो पल दे दो
जिसमे मेरे बड़े भाई पिता तुल्य वो प्यार था
मुझे स्कूल लेकर लेकर जाना स्कूल से लेकर आना
कभी कभी मेरी चोटी खुद ही बनाना मेरे भाई का हाथ से मेरे बालो को कंघी करने का साथ था

मेरी जिंदगी मेरी खुशियों के वो पलदे दे दो जब भैया का डांट पढ़ाई का पाठ मेरे ख़ुशियों का वो ठाठ साथ जाकर घूमना मुझे दुनियाँ का सबसे अधिक प्यार देना
मेरी हर अरमान पल भर में पूरी करना
वो छोटे भाई का प्यार लालटेन के लिये होती टकरार साथ लेकर घूमना उसकी हर विश पूरी करनेकी कोशिश करनाउसका वो प्यार कभी कभी चाय का पिलाना मेरे संग अकेले रहने पर अभी तक हाथ बटाना जीवन के मेरी जर खुशी को निभाने

मुझे ।एरा वो पल।तुम।दे दो मेरी बहन का साथ हर चीज का बांट कभी कभी चोटी भी करना मेरे कपडे सिलकर मुझको देना अपने दोस्तों के घर मुझेको लेकर जाना रास्ते मे कभी कभी चाट का खिलाना

मुझे मेरे वो दोस्त लौटा दो
साथ मिलकर स्कूल का जाना कभी कभी नोकझोक कभी लड़ाई
कभी कॉपी का होमवर्क कभी टयूशन की लड़ाई
कभी कभी रेसुरेन्ट का चाट
कभी ठेले का पानी पूड़ी और ओर आलू की कचालू का स्वाद
कभी दोस्तो की महफिल
कभी फील्ड का वो मैदान
मुझे तुम लौटा दो
मुझे मेरे मन का बचपन फिर से तुम लौटा दो
सिर्फ एक पल को ही सही
मुझे तुम लौट दो

कुमारी मंजू मानस
बिहार शिक्षक छपरा सारण

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