ग्राम टुडे ख़ास

स्त्री हूँ मैं

नीलम राकेश

हाँ,
मैं स्त्री हूँ
गर्व है मुझे
मैं स्त्री हूँ ।

घर के
हर कोने में
मैं बसी हूँ
मैं स्त्री हूँ ।

परिजनों की
भूख में,
बच्चों की
किलकारी में,
मैं ही तो हूँ।

देहरी से
आंगन तक,
मैं ही तो फैली हूँ
क्योंकि
मैं स्त्री हूँ ।

सुगंध
बन बहती हूँ ।
संगीत
बन लहराती हूँ ।
हाँ मैं स्त्री हूँ।

कोना कोना
महकाती हूँ ।
खुशियाँ
फैलाती हूँ ।
हाँ मैं स्त्री हूँ ।

चलो
बात करे
देरी के बाहर की ।
क्योंकि
वहाँ भी मैं हूँ ।

सिमटी
नहीं हूँ मैं,
देहरी के भीतर ।
धरती, नभ, जल,
नाप रही हूँ ।

पुरुष के
कांधे से कांधा मिला,
हर क्षेत्र में
मैं,
झंडे गाड़ रही हूँ ।

खुशियाँ,
बांटना चाहती हूँ
अपने पराए सब में
बांट पाती हूँ
क्योंकि मैं स्त्री हूँ।

गौरवान्वित हूँ
कि मैं स्त्री हूँ ।

नीलम राकेश
लखनऊ
neelamrakeshchandra@gmail.com

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