ग्राम टुडे ख़ास

हवन/ यज्ञ का महत्व

पूनम शर्मा स्नेहिल

हमारी भारतीय संस्कृति में पूजा पाठ हवन यज्ञ आदि का एक अलग ही महत्व है। कुछ लोग इसे दिखावा ढकोसला और न जाने किस-किस नामों से जानते हैं, पर हमारे शास्त्रों में हर एक कार्य को किसी महत्वपूर्ण वजह से करने की योजना बनाई गई थी । उन्हीं में से एक संस्कार यह भी है ।जो कि हमें हमारे धर्म आस्था से जोड़कर उनसे होने वाले फायदों को बढ़ाने में मदद करता है।

हवन में कई प्रकार की आयुर्वेदिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। आम की लकड़ी, नवग्रह लकड़ी, गुड ,तिल ,चावल, जाओ , गाय का घी , लोबान,ऐसे अनेक चीजों का मिश्रण बनाकर हवन सामग्री तैयार की जाती है नियमित रूप से शंख ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है । वही पूजा पाठ और समय पर अर्चना वंदन करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है।
हवन से निकलने वाले धुएं से आस-पास के सभी कीटाणु मर जाते हैं। जो कि हवा में घुले हुए होते हैं इन सब से निकलने वाले धुएं से हमें कभी हानि नहीं होती, परंतु कुछ लोगों ने इसे दिखावे और आडंबर का नाम देकर अपनी सभ्यता और संस्कृति को भुला दिया है।

आज भी कुछ लोग इन नियमों का पालन इसीलिए विधिवत करते हैं क्योंकि वह इनकी उपयोगिता और महत्व को भली-भांति जानते हैं। हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर विश्वास कर उसका पालन करना चाहिए। ना कि लोगों की कही सुनी बातों में आकर अपनी सभ्यता और संस्कृति का त्याग करना चाहिए। हमारी सभ्यता और संस्कृति का लोहा आज पूरा विश्व मान रहा है। यही कारण है कि जिन जगहों पर यह सभ्यता और संस्कृति नहीं थी। वहांँ के लोग भी पूजा आरती कीर्तन अर्चना मस्तक पर तिलक लगाना ऐसे न जाने कितने अनगिनत कार्य जो कि हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग हुआ करती थी। पाश्चात्य शैली वाले लोग इन्हें अपना रहे हैं ,और एक हम हैं जो इन सब को त्याग कर पाश्चात्य शैली को अपना रहे हैं।
हवन के धुए से काफी हद तक बीमारी फैलाने वाले कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और हमें शुद्ध और स्वच्छ वातावरण प्राप्त होता है। यही कारण है कि घर में यदा-कदा हवन कीर्तन होते रहना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा और हानिकारक विषाणु का अंत होता है ,और हमें एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में जीने का अवसर प्रदान होता है। हम बीमारियों से दूर रह पाते हैं ।और मन और दोनों शांत और शीतल रहते हैं।

धन्यवाद

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल☯️
उत्तरप्रदेश गोरखपुर

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