ग्राम टुडे ख़ास

विश्व पर्यावरण दिवस


शास्त्री सुरेन्द्र दुबे (अनुज जौनपुरी)

प्रकृति को ललकार कर,
हश्र सबने देख लिया।
वन बाग को उजाड़ कर,
हश्र सबने देख लिया।।

महासागर को बांध कर ,
हश्र सबने देख लिया।
पहाड़ों को मटियामेट कर,
हश्र सबने देख लिया।।

हम कितने संजीदा हैं,
प्राकृतिक विनाश पर।
प्रकृति के दोहन का ,
हश्र सबने देख लिया।।

निर्लज्जता से देते हैं,
दोष सब प्रकृति को।
प्रकृति के आवेश का,
हश्र सबने देख लिया।।

सब सूखते तालाब कूप ,
धरा का ताप देख लिया।
हर स्वांस के पैमाने का,
हश्र सबने देख लिया ।।

पर्यावरण के संरक्षण की,
बातें हर साल होती हैं ।
सरकारी पौध रोपण का,
हश्र आंखों ने देख लिया।।

सुनो भाषणों का जंगल उगाने वालों

पेड़ लगाने का संकल्प
मन जगाओ,,
इक पेड़ पाल करके दुनियां को तो दिखाओ,,
वर्ना जलेंगे सब विकास की डगर पर,
मत भाषणों का जंगल धरती पे इस उगाओ।।

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