ग्राम टुडे ख़ास

ये तो आँसू भी कमाल के हैं

मेरे रोने पर तुम्हें हंसी मिलती है
तो तुम हंस लो
मैं रो लेता हूँ फिर
मैं न समझ पाया था कि
ये तो आँसू भी कमाल के हैं |

मैं भी हंसूंगा कभी
तो तुम रोना मत
मुझे रुलाना अच्छा नहीं लगता
जब अपना कोई रोता है तो
मुझे हंसना भी अच्छा नहीं लगता
रुलाकर हंसना हंसकर रुलाना
एक खेल है दुनियां का
क्रूरता भरा
इंसान के आंसू निकालने वाले
ये तो आँसू भी बवाल के हैं |

एक हथेली पर दर्द है आंसू
एक हथेली पर सर्द है हंसी
हथेली को हथेली पर धर लो
दर्द को महसूस मत होने दो
खुशी मिलाओ दर्द में
मल दो हथेलियों को
जाफरानी रंग उभरने दो हथेलियों पर
देखो उभरते हुए प्यार के रंग
तो फिर कहोगे
ये तो आँसू भी जंजाल के हैं |

कभी वक्त हंसाता है
कभी वक्त रुलाता है
वक्त के साथ हंसना रोना लगा है
बुरा इसमे कुछ भी नहीं
तो फिर मस्कुराइए
मुस्कुराहट सबसे अच्छी है
गम मे हंसना बुरा है
खुशी मे रोना बुरा नहीं
मुस्कुराना कभी बुरा नहीं
तो ये आँसू भी मलाल के हैं |

हंसी के बाद आंसू हैं
हंसी के साथ निकल आते हैं
मुस्कुराहट आंसू रोकते हैं
अजब जुड़ाव है इनमे
हंसने रोने से गला भर आता है
मुस्कुरा कर देखिए तो सही
समझ जाएंगे आप भी
आज से आंख का यह खारा पानी
जिसे कहते हैं आंसू
ये तो आँसू भी हड़ताल के हैं ||

श्रीकांत यादव
(प्रवक्ता हिंदी)
आर सी-326, दीपक विहार
खोड़ा, गाजियाबाद
उ०प्र०!

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