ग्राम टुडे ख़ास

आपका व्यवहार ही आपके व्यक्तित्व की असली पहचान है

पिंकी सिंघल

भांति भांति के लोग यहां भांति भांति व्यवहार
केवल कर्मों से दिखें यहां सबके ही संस्कार

दोस्तों यह सच है कि जिस दुनिया में हम रहते हैं वह भांति भांति के रंगों से मिलकर बनी है। कहने का मतलब यह है कि इस रंग बिरंगी दुनिया में भिन्न भिन्न प्रकृति ,व्यवहार, विचार और स्वभाव के लोग रहते हैं। किन्ही दो लोगों का स्वभाव बिलकुल एक जैसा नहीं होता ,हर एक व्यक्ति दूसरे से कई बातों में भिन्न हो सकता है और सबका सोचने का ,बोलने का और कार्य करने का तरीका भी भिन्न हो सकता है।सबकी सोच अलग अलग तरह की होती है, सबका दृष्टिकोण एक दूसरे से हटकर होता है और यही सभी चीजें एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से भिन्न बनाती हैं।

अपने दैनिक जीवन में हम हर रोज अलग-अलग विचारों के व्यक्तियों से मिलते हैं और बात करते हैं। दिन भर में ना जाने कितने ही लोगों के संपर्क में हम सभी आते हैं। प्रत्येक व्यक्ति हमें कुछ ना कुछ नया सिखा कर जाता है। उनके द्वारा दिए गए अनुभव से हम सभी कुछ नया सोचने पर भी मजबूर हो जाते हैं ।उनके द्वारा दी गई सीख कभी-कभी सकारात्मक होती है तो कभी-कभी नकारात्मक भी हो सकती है ।

कुछ ऐसे ही मिले जुले अनुभव मुझे भी गत दिनों हुए, जिसे मैं आप सभी के समक्ष साझा कर रही हूं ।अपने इस अनुभव को आप सबके साथ साझा करने का मेरा सिर्फ और सिर्फ एक यही मकसद है कि मैं आप सभी को सिर्फ यह बताना चाहती हूं की किस प्रकार भिन्न-भिन्न स्वभाव के लोग अपने व्यवहार से पल भर में ही हमारे दिलों दिमाग पर अपनी छाप छोड़ते हैं।

बात पिछले शनिवार अर्थात दिनांक 24 जुलाई 2021 की है ।एक लंबे अंतराल के बाद मैं अपनी घनिष्ठ मित्र से मिली थी।काफी देर इधर-उधर घूमने ,मौज मस्ती करने और ढेर सारी शॉपिंग करने के बाद हम दोनों बहुत थक गए । उस वक्त हम दोनों को ही बहुत जोरों से भूख लगी हुई थी ।हम दोनों में निश्चय किया कि अब कुछ पल साथ बैठकर किसी अच्छे रेस्टोरेंट में अपना मनपसंद खाना खाएंगे और जी भर कर बातें करेंगे।पास ही में एक और बहुत ही अच्छा रेस्टोरेंट्स था जैसे ही हम लोग वहां पहुंचे रेस्टोरेंट के बाहर पहुंचे वहां पार्किंग की जगह नहीं थी।पार्किंग वाले गार्ड भैया ने हमें रेस्टोरेंट के पीछे वाली गली में कार पार्क करने के लिए कहा। उनकी सलाह पर मेरी सहेली ने कार रेस्टोरेंट के पीछे की तरफ मोड़ ली और वहां हमें कार पार्क करने के लिए जगह भी मिल गई ।परंतु जैसे ही हमने वहां कार पार्क की हमारे दिमाग में ख्याल आया कि यहां से गाड़ी वापस किस रास्ते से जाएगी क्योंकि वह सड़क बहुत संकीर्ण नजर आ रही थी ।हमें लगा कि यहां वनवे तो नहीं है। मन में उत्पन्न संशय को दूर करने के लिए मेरी सहेली कार से उतरी और पास ही में स्कूटर पर बैठे दो व्यक्तियों से पूछताछ की कि क्या भैया क्या सामने वाले रोड से कार मेन रोड तक निकल जाएगी ।पहले तो वह दोनों व्यक्ति एक दूसरे को देख कर हंसने लगे और बाद में कहा कि मैडम खुद जाकर पता कर लो हमारा यही काम नहीं है कि हम हर आते जाते को रास्ता बताते फिरे उनके इन शब्दों को सुनकर मेरी सहेली हैरान हो गई है और सोचने लगी कि इन भैया को रास्ता नहीं मालूम था तो आराम से यह कहकर भी मना कर सकते थे कि हम आपकी मदद नहीं कर पाएंगे।खैर,वह थोड़ा और आगे बढ़ी और स्वयं जाकर देख कर आई कि वह रास्ता मेन रोड की तरफ निकल रहा है और कार को वहां से निकलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी ।फिर गाड़ी पार्क कर हम दोनों ने रेस्टोरेंट में खाना खाया और ढेर सारी मन की बातें भी की ।

थोड़ा समय वहां
व्यतीत करने के बाद मेरी सहेली को याद आया कि उसे पास ही की एक दुकान से अपने इयररिंग्स बदलवाने हैं जो उसमें 3 से 4 महीने पहले उसी दुकान से खरीदे थे परंतु इयररिंग्स में कुछ कमी जो वह उस वक्त नहीं देख पाई थी ,होने के कारण वह उन्हें उसी दुकान वाले भैया से बदलना चाहती थी और इसलिए हम दोनों उसी दुकान पर पहुंचे और भैया को इयररिंग्स बदलने के लिए प्रार्थना की।दुकान वाले भैया ने इयररिंग देखते ही कहा कि मैडम यह इयररिंग्स तो आपने लगभग 3 से 4 महीने पहले खरीदे थे अब तो यह डिजाइन आना भी बंद हो गया है और हमारा नियम है कि हम 15 दिन के बाद कोई सामान नहीं बदलते ,परंतु मैं यह भी जानता हूं कि पिछले दो-तीन महीनों में हम सभी ने कोरोना के बुरे हालातों को झेला है जिसके चलते शायद आप उसी वक्त यह इयररिंग्स बदलवाने नहीं आ पाई होंगी इसलिए मैं आपकी इयररिंग्स जरूर बदल कर दूंगा क्योंकि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, मानवता नाम की चीज भी होती है और आपने मुझ पर इतना भरोसा दिखाया कि आप 3 महीने बाद भी यह सोच कर कि भैया यह सामान बदल देंगे,आप मेरी दुकान पर इस उम्मीद से आई है और मैं भी आपकी उम्मीद पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा।”बहन जी आप जो चाहे इयररिंग्स ले सकती हैं ,यह इयररिंग्स छोड़ दीजिए ” दुकान वाले भैया की यह बातें सुनकर मेरी सहेली ने मेरी तरफ़ देखा और मैंने उसकी तरफ़। हम दोनों हैरान रह गए कि दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो मानवता जैसे जीवन को अपने जीवन में इतना सर्वोच्च स्थान देते हैं ।

हम ज्यादा हैरान इसलिए भी थे क्योंकि कुछ ही देर पहले कार पार्किंग वाले भैया का व्यवहार और इस दुकान वाले भैया का व्यवहार बिल्कुल भिन्न था।बात सामान बदलने या ना बदलने की ही नहीं थी अपितु व्यक्ति के स्वभाव और व्यवहार की थी जिसके आधार पर हम एक अनजान व्यक्ति के व्यक्तित्व को भी पल भर में पहचान जाते हैं।हमने इयररिंग्स बदलवाए और दुकान के बाहर आ गए ।

उस वक्त मैं और मेरी सहेली बस यही बात सोच रहे थे कि किस प्रकार एक व्यक्ति पल भर के अपने छोटे से व्यवहार से दूसरों के मन पर अपना सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव छोड़ सकता है।

इसलिए दोस्तों ,हम सभी को हमेशा अपने व्यवहार द्वारा दूसरों के दिलों दिमाग पर अच्छा और सुखद प्रभाव छोड़ने का ही प्रयास करना चाहिए नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हम सभी लोगों का मानवता पर से पूरी तरह से विश्वास उठ जाएगा।

पिंकी सिंघल
अध्यापिका
शालीमार बाग
दिल्ली

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