ग्राम टुडे ख़ास

“चुनौतियों से लड़ता आगे बढ़ रहा है आज का युवाधन”

भावना ठाकर
आजकल के युवाओं के बारे में बहुत कुछ है लिखने को…यौवन की धारा लिखूँ, प्रवाह लिखूँ , छुपी हुई कोई चाह लिखूँ, युवाओं का जोश लिखूँ या आँखों का आक्रोश लिखूँ…! आजकल की पीढ़ी के लिए जूझना ही जीवन है।जन्म से लेकर जवानी तक मानों किसी रेस के प्रतिस्पर्धी हो ऐसे उम्र के हर पड़ाव पर दौड़ लगानी पड़ती है। चुनौती में सबसे बड़ी चुनौती बेरोज़गारी आज का युवा अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है। दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है नशा विश्व में भारत सबसे युवा आबादी वाला देश है। हमारे देश में दारु, चरस, गांजा और गुटका हर दो कदम पर सरेआम मिलता है। नशे से उबरना आसान नहीं।
गरीबी, भ्रष्टाचार और मशीनीकरण का अतिरेक युवाओं के सामने मुँह फ़ाडकर खड़ा है। पर एक बात तो है।
आज की जनरेशन कई रंगों में रंगी दिखती है। परवाह नहीं ज़माने की इन्हें आपखुदी ओर दबंगाई के जलवे इनके निराले है। रिश्ते के दायरे भी जानते है और अपना उल्लू सीधा करने के मायने भी जानते है।
आज की युवा पीढ़ी को एक योद्धा ही कहूँगी जन्म से लेकर ज़िंदगी का पूरा सफ़र खुद को साबित करने में स्पर्धात्मक ज़िंदगी जी रहे है, हर जगह पर रेस लगी है एसे में आज की पीढ़ी जीवन को बखूबी जीना जानती है, लड़के तो अपनी ज़िम्मेदारीयाँ निभाने में माहिर ही है चाहे परिवार के प्रति हो चाहे दोस्तों के प्रति या देश के प्रति।पर गर्व इस बात का है की आज कल की युवा लड़कीयाँ शिक्षित, स्वावलंबी, ओर स्वतंत्र है हर क्षेत्र में अपना परचम लहराते काँधे से काँधा मिलाती आगे बढ़ रही है अपने पैरों पर खड़ी रहकर जीवनयापन के लिए किसी पर निर्भर नहीं रही। डिजिटल ज़माने के युवकों को खुद को कई क्षेत्र में प्रस्थापित करना होता है, मौज मस्ती के साथ छोटे से मशीन पर अंगूठा चलाते खुद की पहचान रिसर्च की है, टैक्नोलोजी का बखूबी उपयोग करके देश की उन्नति में अपना भरपूर योगदान दे रहे है।
बहती हवाओं की दिशा में खुद को ढ़ालना जानता है आज का युवान वो है जो हर छुट्टी को मौज से मनाता है तो देश की नींव से जुड़े हर मुद्दे पर अपनी ठोस राय देने पर भी एकजुट होकर खड़े होते है, आज का युवा देश का भविष्य है, आशा है, आधार है राष्ट्र का सबसे ऊर्जावान अभिन्न अंग है। मानव सभ्यता सदियों से विकास के पथ पर है, सही सोच ओर क्षमता का स्त्रोत आज का युवान देश की प्रगति का पायदान है।साथ एक युवा वर्ग खुद को गुमनामी के अंधेरे में धकेल रहा है आधुनिकता की होड़ में खुद को खुल्ले खयालात की श्रेणी में रखने की चाह में हर वो गलत आदतें अपना लेता है जो उसे बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा करती है। दारु, सिगरेट, चरस, गांजा मानों आजकल की फैशन बन गई है अगर आप ये सब नहीं अपनाते तो जाहिल गंवार की लाईन में खड़े कर दिए जाओगे, दिखावेपन की दौड़ में भविष्य धूमिल करते युवाओं को अपना दायरा नापने की जरूरत है उसकी परवाज़ बड़ी तेज है ये सारी गलत आदतें उसके पर काटने की आरि है आगे बढ़ने की कवायद पर रोक है। साथ में समाज की गंदी सोच कई बार किसी युवक को गुमनामी के अंधंरे में धकेल देती है, हर क्षेत्र में खुद को प्रस्थापित कर चुके लोग नये ओर उभरते युवाओं की टांग खिंच कर गिराने के भरकस प्रयास करते है। अब रैगिंग सिर्फ़ स्कूल कालेज तक नहीं रहा, किसी ना किसी प्रकार से नये प्रतिभागियों के साथ होता ही रहता है। मजबूत मनोबल वाले युवा इन सबको नज़र अंदाज़ करते आगे बढ़ते रहते है पर कुछ कमज़ोर मन के युवान इन सारी चीज़ों से हार कर खुदखुशी तक कर लेते है। आज हर माँ-बाप का फ़र्ज़ बनता है अपने बच्चों को सुसंस्कारित करके एक सशक्त बीज को अंकुरित करें। शिक्षक अपने विद्यार्थी को एक प्रबुद्ध, इमानदार, और प्रतिबद्ध नागरिक बनाकर एक सुराष्ट्र का निर्माण करने में अपना अमूल्य योगदान दें और हर युवान ज़िंदगी को एक जंग समझकर खुद को हर परिस्थितियों से लड़ने के लिए काबिल बनाएँ।।
(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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