ग्राम टुडे ख़ास

कान बेचारे

जयश्री बिर्मी

कान पे कूदे नाक पे नाचे – बोलो क्या?
चश्मा,ऐनक । सत्य एकदम सच,पूरे शरीर का शोषित अंग हैं तो बेचारा कान हैं।
बच्चा ज्यादा पढ़ता है ,दूर का दृष्टि दोष आया और चश्मा पहनाया,तकलीफ आंख को और सज़ा कान को,बेचारा….। द्वि चक्री वाहन चलाने लगे,सर रक्षक टोपी पहनो और दबा दो कान को।
दादी नानी को लधु दृष्टि दोष बताया और आया चश्मा, सज़ा कान को,मोटे मोटे कांच वाला भारी भारीभरखम चश्मे की डंडी को चाहिए सहारा कान का।गला खराब था बच्चे का और लहसुन वाला तेल डालो कान में,क्या है ? सभी मुसीबतों के बीच खड़े ये कर्ण युगल की दर्दनाक दास्तान अभी कुछ समय से ओर बढ़ गई है,वो है मास्क,मुंह पटल ।पहले तो फक्त स्वास्थ्य कर्मचारी ही पहनते थे,लेकिन आज तो हर नर और नारी सब ने पहने है मास्क भारी।ढकना हैं मुंह और नाक, और सज़ा है कर्ण युगल को।पहले तो एक एक ही मुहपटल पहनते थे, किंतु अब तो दोहरे पहन ने लगे हैं।दुहाई है कान की पीड़ा की ,कस के पकड़े जाते है बिना कसूर के।जड़ों में घिस घिस के छालें पद जाते हैं।
बचपन में शरारत करते थे हाथ,जिव्हा और आंख और जोर से खींचे जाते थे कान,इतनी जोर से की पैर भी ऊंचे हो खींचने की तीव्रता को कम करने में मदद कर देते थे।
आशा करते है कर्ण युगल कि चश्मे , तेल पूर्ति, कान खिंचाई और मुंह पटल के बाद और जुल्म ना किया जाएं यही प्रार्थना के साथ,मैं आपका कर्ण युगल!!!!

जयश्री बिर्मी
अहमदाबाद

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