ग्राम टुडे ख़ाससाहित्य

मेरा हृदय उद्गार

गिरिराज पांडे

हे ईश्वर ! आपको सदैव ही सादर नमन

शंख चक्र गदा पद्म धारण करने वाले
छीर सागर में सदा निवास करने वाले
समदर्शी द्रिष्टि और विशाल हृदय वाले
पद्मनाभ पीतांबर धारण करने वाले
चतुर्भुज रूप जगत के पालन करने वाले
लक्ष्मी संग सदा विराजमान रहने वाले
शेषनाग सैया पर चयन करने वाले
हे ईश्वर आपको सदैव ही सादर नमन

जो नाथो के नाथ हैं वही भोले नाथ है
त्रिनेत्र गंगाधर शशि भाल भूषित हैं
हाथ में त्रिशूल गले सर्पों का हार है
बैल की सवारी करते खाते धतूर भांग हैं
नीलकंठ भूत भावन भस्म को लपेटे हुए
पहने जो मुगछाला डमरू बजाते हैं
भक्तों को बिन मांगे वरदान देने वाले
पार्वती के संग कैलाश पर विराजमान रहने वाले
हैं ईश्वर आपको सदैव ही सादर नमन

दूध दही खाने वाले गोकुल के घर-घर में
गोपियों के मध्य राधा संग जो विराजमान हैं
गोवर्धन उंगली पर अपने उठाने वाले
गोपियों के संग रास लीला को रचाने वाले
दुर्योधन घर का मेवा त्याग करके
विदुर घर साग का भोग लगाने वाले
द्रोपदी की लाज भरी सभा में बचाने वाले
हे ईश्वर आपको सदा ही सादर नमन

शिव के अनन्य भक्त जन्म हुआ रघुवंश
दशरथ नंदन रमापति अवध बिहारी है
संग में विराजमान रहती जो हरदम हैं
वह तो मिथिला नरेश जनक दुलारी है
भक्तों के हृदय में जो रंजन करने वाले
राक्षस कुल का विनाश करने वाले हैं
पुरुषों में श्रेष्ठ मर्यादा पुरुषोत्तम
हे ईश्वर आपको सदैव ही सादर नमन

भावना बसी है मन में जिसकी सबके कल्याण की
जीवन भर मानव निर्गुण रहता बिना गुरु ज्ञान की
दया माया ममता की जो साक्षात प्रतिमूर्ति हैं
सबके अंदर ज्ञान की ज्योति को जलाने वाले
जीवन में सबको सदमार्ग दिखाने वाले
हे गुरुदेव आपको सदैव ही सादर नमन

करते परिश्रम सदा धूप ताप सहकर्
विवाई फटती मिट्टी में ही रहकर
जाडा गर्मी वर्षा में रहते सामान जो
भूखा ना सुलाते कभी देते अन्नदान जो
अन्नदान सब को सदा ही कर ने वाले
हे अन्नदाता आपको सदैव ही सादर नमन

गिरिराज पांडे
वीर मऊ
प्रतापगढ़

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