ग्राम टुडे ख़ास

मेरे जीवन में पहली से लेकर पीएचडी तक के गुरु….

डॉ रमाकांत क्षितिज

मेरी कक्षा पहली की पढ़ाई मुंबई में श्रीमती रामकली देवी सन्मान सिंह विद्यालय भांडुप में हुई थी। पहली कक्षा के टीचरों के नाम और शक्ल दोनों ही याद नही है।दूसरी में पढ़ाई के दौरान मेरा एक्सीडेंट भांडुप पोलिस चौकी के सामने हो गया। जिस कारण लंबे इलाज के बाद अमेठी चला गया। दूसरी तीसरी और शायद चौथी की मेरी पढ़ाई अमेठी के हारीपुर प्राइमरी स्कूल जो की कुछ पेड़ों के नीचे चलता था। वहां हुई।

हारीपुर स्कूल में वैधिक पुर के राम आधार उपाध्याय जी,पलिया के यादव जी जिनका नाम याद नही है। कल्याणपुर के तेजबहादुर सिंह जी तीन अध्यापक थे। हम सब सभी को पंडित जी ही कहते थे। उपाध्याय जी अब भी सम्पर्क में है, और दोनों तो शायद अब दुनियां में भी नही।

चौथी से दसवीं की पढ़ाई फिर भांडुप के उसी स्कूल में हुई। वहाँ के लगभग सभी टीचर याद है। गणित के ओ.पी.मिश्रा सर,हिंदी , इतिहास के ओ.पी.सिंह सर,साइंस के एस. एन.सिंह, इंग्लिश से एस. पी. सिंह सर.
भूगोल के यादव सर. मराठी के रास्ते सर,उदयभान सिंह सर,बी.एन. सिंह सर,ड्राइंग के मोटे सर,प्रिंसिपल वाई.सिंह ,धर्मराज सिंह सर,इनमें से कुछ से सम्पर्क था इस समय तो नही है।

मैंने दादर के स्वामी विवेकानंद क्लासेस में भी पढ़ाई की थी। वहां के करमरकर सर , भांडुप के ही केशरी मिश्रा सर ने भी मुझे ट्यूशन पढ़ाया है।

लगभग सात आठ महीने मैंने इलेक्ट्रो होमियोपैथी का भी कोर्स किया है। जहाँ डॉ. आर.एन. यादव,डॉ. एस. के.सिंह,डॉ. मिश्रा पढ़ाते थे।

इंटर में रामगंज के जनता इंटर कॉलेज में उमाकांत सिंह सर जिन्होंने फरवरी माह में मेरा ग्यारहवीं में एडमिशन करवाया था। ग्यारहवीं मैंने सिर्फ दो महीने पढ़ाई की है। वहां शीतला सिंह गुरु जी,उमाकांत सिंह गुरु जी,शिव बहादुर सिंह गुरु जी, प्रिंसिपल भी ,सिंह गुरु जी ही थे,ओंकार सिंह गुरु जी।
बी.ए. में के.एन. आई में डॉ. शुक्ला सर,डॉ. पाठक सर, पी.एस. कमला सर. गनपत सहाय कॉलेज में डॉ. एम.पी.सिंह सर, डॉ.पांडेय सर,डॉ. मो.आरिफ़ सर।एम.ए. इतिहास में मो.आरिफ़ सर और याद नही।

एल.एल.बी.प्रथम वर्ष वाई.सिंह,एम.पी. सिंह और याद नही। दूसरे वर्ष से पढ़ाई छोड़ दी थी।एम.ए. हिंदी मुंबई डिस्टेंस में किया।बीएड पनवेल मुंबई में प्रिंसिपल डॉ. शेख मैडम,शिंदे सर,जॉर्ज सर और तो नाम याद नही।

पीएचडी शोध प्रबन्ध के गाइड के.सी.,कॉलेज चर्चगेट मुंबई के डॉ.शीतला प्रसाद दुबे सर। जिनसे सिर्फ सम्पर्क ही नही बना है। वे अभी भी मुझे जीवन संघर्ष में भी गाइड करते रहते हैं।

उपरोक्त सभी टीचर्स अभी भी मन मस्तिष्क में है। कुछ और भी है। इस समय उनका नाम याद नही। पर चेहरे को इस समय भी चित्त में देख पा रहा हूं।वैसे तो अनगिनत आत्माओं ने मुझे मार्ग दिखाया है। बहुत से महापुरुषों ने भी मुझे ज्ञान दिया है। बहुत सी महान महिलाओं ने भी मार्गदर्शन दिया है।कबीर, विवेकानंद,ओशो और सुनील गुप्ता ने मुझे बहुत बार मार्गदर्शन दिया है।

माता पिता ,परिवार ,पूरा समाज ,पेड़ पौधे, नदी,पर्वत,सजीव, निर्जीव ,मित्र शत्रु,जिनसे प्रेम स्नेह है। सभी से कुछ न कुछ सीखा ही है।

कान्हा …जिनके हम सब है। कान्हा को शब्दों में व्यक्त नही कर सकता। सिर्फ महसूस कर सकता हूं। भीतर,बाहर शरीर और शरीर से परे जो कुछ भी है, सब के गुरु…

गुरुपूर्णिमा को आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं…

उपरोक्त सभी गुरुजनों को हृदय से सादर प्रणाम…नमन

संकलन

विनोद कुमार सीताराम दुबे

संस्थापक

सीताराम ग्रामीण साहित्य परिषद

एवं इंद्रजीत पुस्तकालय जुडपुर

रामनगर विधमौवा मड़ियाहूं

जौनपुर उत्तर प्रदेश

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