ग्राम टुडे ख़ास

मित्र कम्प्यूटर

राकेश चन्द्रा


आधुनिक जीवनशैली में नित्य प्रति के कार्य-व्यवहार के निष्पादन में कम्प्यूटर का प्रयोग अपरिहार्य बनता जा रहा है। सभी कार्यालयों, छोटे-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों, घरों एवं शिक्षालयों में कम्प्यूटर का प्रयोग अब सामान्य बात हो गई है। केन्द्र सरकार द्वारा ‘डिजिटल इण्डिया’ योजना कार्यक्रम के तहत अब गाँव-गाँव में इन्टरनेट का फैलाव होता जा रहा है। यहाँ तक कि अब गाँव और कस्बे के युवा भी कम्प्यूटर पर कार्य करने का विधिवत प्रशिक्षण लेकर सेवा-रोजगार के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में अब अधिकांशतः समस्त कार्य कम्प्यूटर पर होने लगा है। इसी प्रकार छोटे-छोटे व्यवसायी भी अपने बहीखाते कम्प्यूटर पर बनाने लगे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के कार्य करने से लेकर लिखित परीक्षाएँ भी सीमित स्तर पर कम्प्यूटर पर आयोजित करायी जाने लगी हैं। प्रायः आम जिंदगी के सभी संदर्भों में कम्प्यूटर का प्रवेश हो चुका है जिसके फलस्वरूप आम लोगों के लिये रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं। हमारी दुनिया अब तेजी से डिजिटल दुनिया में परिवर्तित हो रही हैं।
इसमें कोई सन्देह नहीं है कि कम्प्यूटर के प्रयोग ने कई वर्षों में हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। परन्तु इसके असीमित एवं अमर्यादित प्रयोग ने हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिये कई विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न कर दी हैं । यह वैज्ञानिक तथ्य है कि कम्प्यूटर का प्रयोग अधिक लम्बे समय तक नहीं करना चाहिये। ऐसा करने से हम अनेक प्रकार की बीमारियों को न्योता देते हैं। परन्तु निजी प्रतिष्ठानों में, जहाँ लगभग सारा कार्य कम्प्यूटर पर ही होता है, कार्मिकों को प्रतिदिन लम्बी अवधि तक कम्प्यूटर पर कार्य करना पड़ता है। इसी प्रकार आजकल पढ़ने वाले बच्चे भी अपनी पढ़ाई में कम्प्यूटर का सहयोग लेने लगे हैं । प्रायः देखा जाता है कि बच्चे भी लम्बे समय तक एकाग्रता के साथ कम्प्यूटर का उपयोग करते रहते हैं। ऐसा करना किसी भी दशा में उचित नहीं है।
कम्प्यूटर के प्रयोग में एक सावधानी और अपेक्षित है। इसका प्रयोग विशेष रूप से बनाई गई कम्प्यूटर टेबल पर ही करना चाहिये। कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता के शरीर से कुछ दूरी पर होना चाहिये। इस प्रकार उपयुक्त टेबुल-कुर्सी के प्रयोग से काफी हद तक संभावित खतरों से बचा जा सकता है। कम्प्यूटर का प्रयोग करते समय बैठने की मुद्रा अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं। कुछ लोग लेटकर या बैठे-बैठे अपने वक्ष या पेट पर रखकर कम्प्यूटर का प्रयोग करते है जो नितान्त अवैज्ञानिक है तथा हानिकारक भी है।
वैज्ञानिकों की धारणा है कम्प्यूटर के माॅनिटर से अल्ट्रावायलेट रैडियेशन, एक्स-किरणें व ई.एम.एफ. रैडियेशन निकलता है। कम्प्यूटर के पुराने माॅडल जिनमें कैथोड रे ट्यूब का प्रयोग होता है, उनमें इस प्रकार के रैडियेशन की अधिक सम्भावना बनी रहती है। ये सभी विकिरण शरीर के विभिन्न अंगों पर सीधा प्रहार करते हैं। काफी समय तक लगातार बैठकर कम्प्यूटर पर कार्य करने वाले लोगों की उँगलियों व हाथों में तथा आँखों में इसका विशेष रूप से दुष्प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति को लगातार सिरदर्द व स्वभाव में चिड़चिड़ेपन की शिकायत बनी रहती हैं। इतना ही नहीं, निकलने वाला रैडियेशन शरीर के भीतर प्रवेश करके विभिन्न अवयवों को भी धीरे-धीरे नुकसान पहुँचाता है।
कम्प्यूटर के लगातार प्रयोग से बचना ही विकल्प है। विशेषज्ञों का मत है कि कम्प्यूटर पर काम करते समय हर एक-एक घंटे के बाद कुछ मिनटों का ब्रेक लेना काफी लाभप्रद सिद्ध होता हैं। इस ब्रेक की अवधि में कम्प्यूटर से दूर जाकर थोड़ा-खुले परिवेश में चहलकदमी कर लेना बहुत आवश्यक है। इसके साथ ही जिस कक्ष में कम्प्यूटर रखा गया हो, वहाँ गमलों में हरे-भरे पौधे रोपित करके रखने से भी लाभ होता है। हरी पत्तियाँ न केवल उत्पन्न विकिरण को सोखने में सहायक सिद्ध होती हैं, वरन हरियाली देखकर आँखों को भी सुख मिलता हैं। अतः समय रहते अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना हम सबका प्रथम कत्र्तव्य हैं। यद्यपि कम्प्यूटर का प्रयोग हमारी मज़बूरी बनता जा रहा है, तथापि समुचित सावधानी बरत कर हम इससे होने वाले दुष्प्रभाव से स्वयं को अवश्य बचा सकते हैं।
राकेश चन्द्रा
लखनऊ

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