ग्राम टुडे ख़ाससाहित्य

संजीवनी

किरण मिश्रा ‘स्वयंसिद्धा

“संजीवनी” बन
हर लम्हा .
……….घुलते हो,
मेरी “रूह”में
शब्दों में,
साँसों में,ज़ज़्बातों में
महकती सुबहों,नशीली रातों में………!

“चंदन” से महक उठते हो
हर पल
मेरे अरमानों में…अधरों पर,
आँखों में,माथे पर, बाहों में ,

मेरे उर की गलियों,
मेरी शरमीली शामों में
दिल के मधुवन में
दूधिया चाँद से नहाई रातों में…….!

“मयूर” सा मचल उठता है …मेरा ये चंचल मन ,
तेरे प्यार की
उस बारिश में खुद को
भिगोने,रसमोने,निहारने ,
नाचने-गाने ………
और अन्तस तक डूब जाने में………..!!””

किरण मिश्रा ‘स्वयंसिद्धा’
नोयडा

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