ग्राम टुडे ख़ास

संस्कार

कमलेश मुद्ग्ल

बच्चों को संस्कार कौन दे ? क्या सिखाये? कई बार लोग ये सवाल करते हैं l बच्चों को बचपन से ही हम अच्छे विचारों की सीख देते हैं l कई बार छोटे छोटे बच्चे इस बात को मान लेते हैं l कई बार अपनी ज़िद में आते ही उन बातों को नकार देते हैं l लेकिन माता- पिता परेशा न हो जाते हैं l छोटा सा उदाहरण, एक बच्चा पाँच वर्ष का है, उसे सीख दी कि झुठ नहीं बोले l वह नहीं बोलता, पर छठे साल में वह खूब झूठ बोलने की कोशिश करता नहीं, बोल बोल कर आदत बना ले तो दु:ख होता है l डाँटने पर ये कह देता है, आप भी तो यही करते हैं l तब कोई चुप हो जाता है, कोई एक चांटा लगा देता है l लेकिन ये नहीं सोचता कि__ बच्चे ने ये सही कहा है l सच है कहना और उस पर चलना दोनों अलग अलग हैं l आप बच्चे के लिए आदर्श है l उस पर आपको चलना ही होगा l आप अपने को बदलना होगा, जो आसान नहीं होता l आप को अपनी आदतों पर एक नज़र दौड़ानी होगी l अपने जिगर के टुकड़े को, आप ही बेहतर समझ सकते हैं l उसको अच्छे संस्कार दे सकते हैं l आज जो आप उसमें अच्छे विचारों को, भर देंगे, कल वही बड़ा गुलदस्ता बनकर उसके लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगा l कुछ आदतें बदल कर आप समाज को एक, गुणी व्यक्ति दे सकते हैं l कई बार ये काम आसान लगता है, कई बार बहुत ही कठिन l लेकिन आपको कोई रोक नहीं सकता l थोड़ा बदल जाएं, इतना ही करना है l

कमलेश मुद्ग् ल ( दिल्ली)

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