ग्राम टुडे ख़ास

सावधानी हटी दुर्घटना घटी……..

राकेश चंद्रा

काफी समय पूर्व लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ अभियन्ता ने जब यह बताया कि अच्छी सड़कें बनने से दुर्घटनाएं बढ़ी हैं तो एकाएक विश्वास नहीं हुआ। किसी सफर के दौरान रास्ता काटने के उद्देश्य से प्रारम्भ किये गये वार्तालाप के उपरोक्त अंश भले ही तात्कालिक रूप से  अविश्वसनीय लगें हो पर आज इतना समय बीत जाने के बाद उनके कहे वे शब्द सोचने को अवश्य मजबूर करते है। निःसन्देह पिछले दस-पन्द्रह वर्षों में सड़कों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कई राजमार्ग तकनीकी दृष्टि से उच्च कोटि के बने है, पर जहाँ तक सड़क दुर्घटनाओं का प्रश्न है उसमें प्रतिवर्ष बढ़ोत्तरी ही परिलक्षित होती है। ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रत्येक एक मिनट पर एक गंभीर सड़क दुर्घटना होती है और प्रत्येक चार मिनट में सड़क दुघटनाओं के परिणामस्वरूप एक मृत्यु होती है। दुनिया के किसी भी देष में सड़क दुघटनाओं से इतनी मृत्यु नहीं होती जितनी कि हमारे देश में होती है। साल में औसतन डेढ़ लाख के करीब होने वाली मौतों से पन्द्रह से बीस गुना अधिक लोग इन दुर्घटनाओं में घायल होते हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार इन दुर्घटनाओं के फलस्वरूप प्रतिवर्ष सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन प्रतिशत की क्षति होती है। कुल मिलाकर सड़क दुर्घटनाओं के फलस्वरूप चतुर्दिक नुकसान ही मानो हमारी नियति बन गई है।
सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती प्रवृत्ति की चिन्ता हमारे शीर्ष न्यायालय उच्चतम न्यायालय को भी है। इसीलिए हाल ही में न्यायालय द्वारा एक विशेष पैनल का गठन किया गया है जो इन दुर्घटनाओं के कारणों एवं सड़क सुरक्षा के बेहतर उपायों के परिप्रेक्ष्य में अपना परामर्श प्रस्तुत करेगा। इस प्रकार भविष्य में हमें सड़क सुरक्षा के संबंध में बेहतर व्यवस्था देखने को मिलेगी, इसमें सन्देह नहीं है। पर यहां उन बातों पर ध्यान देने की अत्यधिक आवश्यकता है जिनके कारण अक्सर सड़क दुघटनाएं होती हैं। निजी वाहन चालकों के सन्दर्भ में विचार करें तो हम पाएंगे कि बहुत कम वाहन चालक ऐसे हैं जो लम्बी अथवा मध्यम दूरी की यात्रा करने से पूर्व अपने वाहन की जाॅंच किसी अधिकृत गैराज से करवाते हंै। ब्रेक, लाइट, हवा, ईधन आदि की नियमित जाॅंच करना तो वैसे भी जरूरी है, पर यात्रा में जाने से पूर्व ऐसा करना और भी आवश्यक हो जाता है। इसके अतिरिक्त वाहन दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण ‘ओवरटेकिंग’ की समस्या है। अच्छी सड़कों पर मुख्यतः एवं अन्य सड़कों पर थोड़ी जगह दिखाई पड़ने पर अपनी गाड़ी को आगे निकालने की प्रवृत्ति अक्सर खतरनाक रूप ले लेती है। वाहन चलाने वाले अक्सर सही साइड देखे बिना दाॅंयी अथवा बाॅंई किसी भी तरफ से आगे वाले वाहन को ओवरटेक करने की कोषिष करते हैं। ऐसा नहीं है कि ओवरटेक करने वालों को   किसी खास किस्म की जल्दी हो, बल्कि कई लोगों को ऐसा करके एक अजीब किस्म का ‘रोमांच’ का अनुभव होता है। इतना ही नहीं, कई लोग शराब पीकर वाहन चलाने का दुस्साहस भी करते हैं और अक्सर दुष्परिणाम भी झेलते हैं। लम्बे सफर में यह भी जरूरी है कि थोड़ी-थोड़ी दूर पर गाड़ी रोककर अल्प विश्राम किया जाए ताकि गाड़ी चलाने के लिये वांछित चुस्ती-फुर्ती बनी रहे।
आजकल, गाड़ी चलाते समय मोबाइल सुनने या बात करने की आदत भी आम बात है। युवा लोगों में इयरफोन लगाकर संगीत सुनना या गाड़ी चलाते समय कुछ-कुछ खाते रहने की प्रवृत्ति भी कभी-कभी घातक सिद्ध होती है, क्योंकि ऐसा करने से चालक का ध्यान सामने सड़क से हट जाता है और निमिष मात्र में दुर्घटनाएं घट जाती हैं। कुल मिलाकर सड़क दुर्घटनाओं से बचने का मूलमंत्र यह है कि यथासंभव सावधानी बरती जाए। सड़क पर चलते समय यह ध्यान अवश्य रखा जाय कि थोड़ी सी असावधानी से हम न केवल अपनों की वरन दूसरों की जिन्दगी को भी प्रभावित करते हैं जिसका हमें कोई अधिकार नहीं है। मात्र ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, वरन लाइसेंस की शर्तों को समझना तथा ट्रैफिक नियमों की सम्यक जानकारी व सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने का संकल्प परमावश्यक है। वाहन निजी हो या सार्वजनिक अथवा वाणिज्यिक, उपरोक्त नियम सभी के लिए समान रूप से लागू हंै।
अब समय आ गया है कि हंॅसते-खेलते जीवन को सड़क दुर्घटनाओं से काल कवलित न होने दिया जाए और दृढ़ संकल्पित होकर जिन्दगी के सफर को खुशनुमा बनाया जाए।

राकेश चंद्रा
लखनऊ

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