ग्राम टुडे ख़ास

श्री राम जी की अजोध्या:धरा केर तीरथ

डॉ. ज्ञानवती दीक्षित

पंचौं राम जोहार!
आप सब जानत हौ वर्तमान केर सबसे सुखद प्रतिच्छा है राममंदिर केरी।कब बनी? आखिर मुद्दा का है? ई विवाद है का?अजोध्या केर नाम अथर्व वेद१०/३/३१मां आवा है,जी का अर्थ सुशासन केर प्रतीक अजोध्या नगरी है।कोसल नाम वैदिक साहित्य मां आवत है।जी का अवध क्षेत्र कहा गा,ऊका तौ नाम शायद अजोध्या के कारन प्रचलित भा।ऋग्वेद मां सरयू नदी केर उल्लेख आवत है।अवधक्षेत्र केर सबसे बड़ी निधि है सरयू और सरयू के तट पर बसी है धर्मनगरी अजोध्या।ई क्षेत्र केरे लोकगीतन मां सरयू केर बड़ी महिमा है-
“नित प्रति उठिकै करीला नहान,विमल जल सरजू के।”
और सुनौ-
“सब देवतन मां ब्रहम बड़े हैं,सब नदियन मां सरजू पुनीता।”

लोकगीतन केरी सिया देवीदेउतन का पूजि के असीस मांगिन-
“नगर अजोधिया कै सासुर मांगै ,नित उठ सरजू नहान।”
हमरे चाचा जब नहाय जांय, तौ हर लोटा जल के साथ एक नदी केर आवाहन करैं।अब ऊ गीत तौ भूलिगा,पर सरजू याद हैं।माने अवध संस्कृति मां रची बसी हैं सरजू और उनकी अजोध्या।
ई क्षेत्र मां शील और सदाचार केरी जौ संस्कृति पनपी,ऊके मूल हैं राम और सिया।ई संस्कृति का मिटावै के लिए बाबर और औरंगजेब पूरी ताकत झोंकि दिहिन,लेकिन ई क्षेत्र से जन-जन के मन पर पडत पानी की बूंद के साथ सरयू का नाम मिटाय नांही पाए।मंदिर टूटिगा,मूर्ति टूटि गयीं।सिया राम हर भारतीय के हृदय मां आय विराजे।बस हियैं औरंगजेब फेल होइगा।ई भारत है।हियां कण-कण मां राम हैं,बूंद बूंद मां सरयू।
बाल्मीकि रामायण मां लिखा है-
“अयोध्या नाम् नगरी तत्रासिल्लोकविश्रुता,
मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयं।।”
रामचरितमानस मां अवध शब्द कइयौ जगह आवा है-
“तहहिंअवध जहां राम निवासू।तहहिं दिवस जंह भानु प्रकासू।।
अवध राज सुर राज सिहाई ।दशरथ धन सुनि धनद लजाई।। “
बस यहै धन लूटै के लिए बार बार उजारी गै अजोध्या,उजारा गा कश्मीर,मारे गे ब्राह्मण।लेकिन ई देश केरी उजली रसवंती संस्कृति मिटाए नाय मिटी।तुलसी बाबा लिखिन-
“एक भरोसो एक बल , एक आस विश्वास।
एक राम घनश्याम हित,चातक तुलसीदास।।
चातक तुलसी के मजे,स्वातिहु पियै न पानि।
प्रेम तृषा बाढति भली,घटे घटैगी आन।।
रटत रटत रसना लटी, तृषा सूखिगे अंग।
तुलसी चातक प्रेम कौ,नित नूतन रुचि अंग।।”
ई अजोध्या केरी भक्ति है।ई भक्ति मानवीय मूल्यों, मानवीय उच्चादर्श और आचरण केले अन्यतम प्रतिमानन केर रचयिता है।अइसी अजोध्या का बार बार उजारा गा,रक्तपात भा।तुलसी बाबा तबहूं लिखिन-
“सात दीप नौ खंड लौं,तीनि लोक जग मांहि।
तुलसी भांति समान सुख,अपर दूसरो नाय।।
महा सांति जल परसि कै,सांत भए जन जोइ।
अहम अगिनि ते नहिं दहै,कोटि करै जो कोइ।।”
केतना दर्द है,केतना अनुभव है!अजोध्या केरी भावभरी ,भक्ति भरी पावन भूमि केरे रामभक्त केर दर्द।यहे दर्द से फूटी रामलीला,घर घर मंदिर,हर घर राम।तोडौ!केतने राम तोडिहौ?हर हिन्दू के हृदय मां बसे हैं राम!ई अद्भुत विरासत तुलसी बाबा हम सबका दै गे हैं।स्वाभिमान ई की रंग रंग मां भरा है।सन्१८५७केर स्वतंत्रता संग्राम साक्षी है।अनवरत आक्रमणन के शिकार ई क्षेत्र मां अवध संस्कृति आजौ जिंदा है।हर घर केर आदर्श रामकथा।हर घर मां एक रामदरबार केर चित्र जरुर मिली।हर पत्नी केर आदर्श सीता।हर सेवक केर आदर्श हनुमान जी,और हनुमान जी अवध क्षेत्र के कोने कोने मां।आतताइन केरी लंका जरावै वाले हनुमान जी की वंदना हियां बच्चे बच्चे का याद।आपन दर्द रामै से कहत है हियां केर जनमानस।काहे से कौनो औरंगजेब,कौनो बाबर हियां लूटै और उजारै के अलावा कुछ और नाय देखिस-
“दै देत्यौ राम हमारेउ मन धिरजा।
सबके दुआरे रामा दिअना बरत है,करि देत्यौ हमरेउ अंजोर।
सबके रसोई रामा जेवना पकत है,हरि लेत्यौ हमरिउ भूख।।
हमारेउ मन धिरजा।”
ई है अजोध्या केरी भूख।हमार मंदिर बनि जाय।हमरेउ मन मां उजेर होय।कितनी प्रतीक्षा।कितना धीरज।अंतहीन संघर्ष।हरिओम पवार का लिखैक परा-
” बाबर हमलावर था, मन में गढ़ लेना
इतिहासों में लिखा है,उसको पढ़ लेना
जो तुलना करते हैं बाबर-राम की
उनकी बुद्धि है निश्चित किसी गुलाम की।

राम हमारे गौरव के प्रतिमान हैं
राम हमारे भारत की पहचान हैं
राम हमारे घट-घट के भगवान् हैं
राम हमारी पूजा हैं अरमान हैं
राम हमारे अंतरमन के प्राण हैं
मंदिर-मस्जिद पूजा के सामान हैं‌।

राम दवा हैं, रोग नहीं हैं सुन लेना
राम त्याग हैं, भोग नहीं हैं सुन लेना
राम दया हैं ,क्रोध नहीं हैं जग वालों
राम सत्य हैं ,शोध नहीं हैं जग वालों
राम हुआ है नाम ,लोकहितकारी का
रावण से लड़ने वाली खुद्दारी का।।”
आलोक श्रीवास्तव ने लिखा-
“सरयू-तट के जनपदों से लेकर
मुंबई की उजाड़ मिलों तक
भूख और ज़ुल्म का मंज़र था
क़त्लेआम थे
एक आँसू अटका हुआ
चीर नहीं पा रहा था
पाताल
निराला के राम का आँसू
कितना बेबस था!”
मुकेश चंद्र मिश्र की वाणी में यह दर्द छलक छलक पडा-
“फिर भी इस सेकुलर भारत में राम नाम अभिशाप हुआ।
मंदिर बनवाना बहुत दूर पूजा करना भी पाप हुआ।।
90 करोड़ हिंदू समाज इससे कुंठित रहते हैं।
उनकी पीड़ा को समझे जो उसे राष्‍ट्रविरोधी कहते हैं।।
हिंदू उदारता का मतलब कमजोरी समझी जाती है।
हिंद में ही हिंदू दुर्गति पर भारत माता रोती है।।
हे लोकतंत्र के हत्‍यारों सेकुलर का मतलब पहचानो।
मंदिर कहना यदि बुरी बात तो राम का घर ही बनने दो।
गृह निर्माण योजना तो सरकार ने ही चलवाई है।
तो राम का घर बनवाने में आखिर कैसी कठिनाई है।।
हे हिंदुस्‍तान के मुसलमान बाबर तुगलक को बिसराओ।
यदि इस मिट्टी में जन्‍म लिया तो सदा इसी के गुण गाओ।।”
ई संघरषन मां लोक संस्कृति आपन काम करत रही।शरद त्यौहारन केर रितु है।अजोध्याऔर दीपावली-दूनौ भारत केरी पहिचान हैं,भारत केरी अलौकिक धर्मध्वजा का थामे अजोध्या प्रकृति केरे सौंदर्य बोध के साथै मानवता केरे अमिट जीवनमूल्यन और आदर्शन का लइके चली है।
“सांझ समय रघुवीर पुरी की शोभा आज बनी।
ललित दीपमालिका बिलोकहिं हितकारी अवध धनी।
फटिक भीत शिखरन पर राजति,कंचन दीप मनी।
जनु अतिनाथ मिलन आयो,सोभति सहस मनी।”(गीतावली से)
संझवतिया बेरिया अजोध्या केरी दीपमालिका केरी शोभा देखै के लिए श्री राम निकरे। विशाल भवन हैं,उनके शिखरन पर सोने केरे दिया जरि रहे हैं,जगमगाय रही है दुलहिन तरह अजोध्या।रात अंजोरिया होय गै।अइस लागत है हजारन बन वाले शेषनाग मणिन का सजाय के श्री राम से मिलै आएं हैं।
“अवधपुरी अति रुचिर बनाई ,देवन्ह सुमन वृष्टि झरि लाई।
राम कहा सेवकन्ह बुलाई,प्रथ सखन्ह अन्वावहु जाई।”
अंजोरिया बहुत सुंदर सजी हैं।देव पुष्प बर्षा कै रहे हैं।श्री राम सेवकन से कहत हैं –
“हमरे सखा लोगन का नहवाय लावौ।
सुनत राम अभिषेक सुहावा,बाज गहागह अवध बजावा।
राम सीय तन सगुन जनाए,फरकहिं मंगल अंग सुहाए।”(श्री राम चरित मानस)
श्री राम जी केरा राज्याभिषेक होय वाला है,जानि के उल्लास छायगा।बधावा बजै लगे।सिया राम के शुभ सगुन होय लगे।
लंका विजय केरे बाद जब प्रभु लौटे,ऊ कतिकी अमावस्या केर दिन रहै।वहे दिन दिवाली मनी।निशाचरी सत्ता पर जीवनमूल्यन केरी जय भई।निशाचरी अंधेर सीता का बंदी किए रहै।अजोध्या केरी अंजोरिया सीता मुक्त भईं, मानौ बंदी मानवता मुक्त भई।
ई नान्हे नान्हे दिया प्रतीक बनिगे कि अन्याय हमेशा मिटी।नियाव होई।लक्ष्मी जी इन दियेन केरे उजेर मां घर घर पधरिहैं।
“कंचन कलस विचित्र संवारे।
सबहिं धरे सजि निजनिज द्वारे।।
बंदनवार पताका केतू।
सबन्हि बनाए मंगल हेतू।।
सुमनवृष्टि नभ सकल
भवन चले सुख कंद।
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं
नगर नारि नर वृंद।।”
अबकी अजोध्या मां अइस राजा है,जौ पूरी अजोध्या का राममय कै दिहिस। आदरणीय योगी आदित्यनाथ, सिर्फ प्रदेश केरे मुख्यमंत्री नाय हैं,वै धर्मप्राण जनता केरी आशा हैं और विश्वास हैं।अबकी वै कहिन राम केरी मर्यादा के साथ अजोध्या जीत की ओर बढि रही है।
“कटेंगे तभी ये अंधेरे घने जब,
स्वयं धर मनुज दीप का रुप आएं।
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना ,
अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।”
योगी बाबा केरे साथ ई आरती भारत केरी धर्मप्राण जनता कै रही रहै-
“करहिं आरती आरतिहर के।
रघुकुल कमल विपिन दिनकर के।
पुर सोभा संपति कल्याना,
निगम सेष सारदा बखाना।।”
अब रामजन्म भूमि केरे इतिहास पर नजर डारी जाय। आखिर दक्षिण भारत मां एत्ते मंदिर अबहिंव हैं।उत्तर भारत केरे लाखन मंदिर कहां चले गे?गंगा जमुनी संस्कृति केरी दुहाई देय वाले बतावैं,हियां केतने हिन्दुन के खून पर ई गंगा जमुनी संस्कृति पली? आखिर घर घर मंदिर काहे बनै लगे?उत्सवधर्मी हिन्दू मंदिरन से दूर रहै के लिए काहे विवश भे? हम सुनाइत है ई दर्दभरी कहानी-
भगवान राम केरा जन्म 5114 ईस्वी पूर्व मां उत्तरप्रदेश केरे अजोध्या नगर मां भवा रहै। जैन धर्म केरे प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव केरा जन्मौ अजोध्या मां भवा रहै। आक्रांता आवै के पहिले हियां हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म केरे सैकड़न मंदिर और स्तूप रहैं। विदेशी आक्रांता बाबर केरे आदेश पर सन् 1527-28 मां अजोध्या मां राम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर का तोड़िके एक मस्जिद केर निर्माण कीन गा। कालांतर मां बाबर केरे नामे पर ई मस्जिद केर नाम बाबरी मस्जिद रखा गा।
जब मंदिर तोड़ा जाय रहा है ,तब जन्मभूमि मंदिर पर सिद्ध महात्मा श्यामनंदजी महाराज केर अधिकार रहै। वै समय भीटी केरे राजा महताब सिंह बद्रीनारायण मंदिर का बचावै के लिए बाबर केरी सेना से युद्ध लड़िन। कई दिनन तक युद्ध चला और अंत मां हजारन वीर हिंदू सैनिक शहीद होइगे ।
इतिहासकार कनिंघम अपने ‘लखनऊ गजेटियर’ के 66वें अंक केरे पृष्ठ 3 पर लिखिस -1,74,000 हिन्दुन केरी लाशैं गिरि जाय के बाद मीर बाकी अपने मंदिर ध्वस्त करने केरे अभियान मां सफल भा।
वै समय अयोध्या सेने 6 मील केरी दूरी पर सनेथू नाम के एक गांव केरे पं. देवीदीन पाण्डेय हुवां के आसपास केरे गांवन सराय, सिसिंडा, राजेपुर आदि केरे सूर्यवंशीय क्षत्रिन का ऐकट्ठा कैके फिर से युद्ध किहिन। पं. देवीदीन पाण्डेय सहित हजारन हिन्दू शहीद होइगे ।बाबर केरी आतताई सेना जीत गै।देश केर दुर्भाग्य जागा।
पाण्डेयजी केरी मृत्यु केरे 15 दिन बाद हंसवर केर महाराज रणविजय सिंह हजारन सैनिकन केरे साथ मीरबाकी केरी विशाल और शस्त्रन से सुसज्जित सेना सेने रामलला का मुक्त करावै के लिए आक्रमण किहिन लेकिन महाराज सहित जन्मभूमि केरे रक्षार्थ सब वीरगति का प्राप्त भए।
स्व. महाराज रणविजय सिंह केरी पत्नी रानी जयराज कुमारी हंसवर अपने पति केरी वीरगति के बाद खुद जन्मभूमि की रक्षा के कार्य का आगे बढ़ावै केर बीड़ा उठाइन और 3,000 नारिन केरी सेना लैके वै जन्मभूमि पर हमला बोलि दिहिन और हुमायूं केरे समय तक वै छापामार युद्ध जारी रखिन।
स्वामी महेश्वरानंद संन्यासिन केरी सेना बनाइन। रानी जयराज कुमारी हंसवर के नेतृत्व मां ई युद्ध चलत रहा। लेकिन हुमायूं केरी शाही सेना से ई युद्ध मां स्वामी महेश्वरानंद और रानी जयराज कुमारी लड़त भए अपनी बची भई सेना के साथ शहीद होय गईं और जन्मभूमि पर मुगलन केर अधिकार होइगा।

मुगल शासक अकबर केरे काल मां शाही सेना इन युद्धन से कमजोर होय रही रहै। अकबर बीरबल और टोडरमल केरे कहै पर खस की टाट से वै चबूतरे पर 3 फीट केर एक छोटा मंदिर बनवाय दिहिन। अकबर केरी ई कूटनीति से कुछ दिन के लिए जन्मभूमि मां रक्त नाय बहा। यहै क्रम शाहजहां केरे समय चलत रहा।
फिर औरंगजेब केरे खूनी काल मां भयंकर दमनचक्र चलाय के उत्तर भारत से हिन्दुन केरे संपूर्ण सफाए केर मिशन चलावा गा। ऊ लगभग दस बार अयोध्या मां मंदिरन का तोड़ै केर अभियान चलाइस। हियां के सब प्रमुख मंदिर और उनकी मूर्ती तोड़ि डारी गयीं। औरंगजेब केरे समय मां समर्थ गुरु श्रीरामदासजी महाराज केरे शिष्य श्रीवैष्णवदासजी जन्मभूमि का मुक्त करावै के लिए तीस बार आक्रमण किहिन।
नसिरुद्दीन हैदर केरे समय मां मकरही के राजा केरे नेतृत्व मां जन्मभूमि का पुन: अपने रूप मां लावै के लिए हिन्दुन के तीन आक्रमण भए ,जीमां बड़ी संख्या मां हिन्दू मारे गे। ई संग्राम मां भीती, हंसवर, मकरही, खजूरहट, दीयरा, अमेठी केरे राजा गुरुदत्त सिंह आदि सम्मिलित रहैं। हारत भई हिन्दू सेना केरे साथ वीर चिमटाधारी साधुन केरी सेना आय मिली और ई युद्ध मां शाही सेना केरी हार भई और जन्मभूमि पर पुन: हिन्दुओं का कब्जा हो गया। लेकिन कुछ दिन केरे बाद विशाल शाही सेना पुन: जन्मभूमि पर अधिकार कै लिहिस और हजारन रामभक्त हिन्दू कत्ल कै दीन गे।
‘फैजाबाद गजेटियर’ मां कनिंघम लिखिन- ‘ई संग्राम मां बहुत भयंकर खून-खराबा भवा। 2 दिन और रात होय वाले ई भयंकर युद्ध मां सैकड़न हिन्दुन केरे मारे जाय के बावजूद हिन्दू श्रीराम जन्मभूमि पर कब्जा कै लिहिन। इतिहासकार कनिंघम लिखत है कि ई अयोध्या केर सबसे बड़ा हिन्दू-मुस्लिम बलवा रहै। हिन्दू आपन सपना पूर किहिन और औरंगजेब केरे विध्वंस कीन गे चौतरे का वापस बनाइन। चबूतरे पर 3 फीट ऊंचे खस केरे टाट से एक छोटा-सा मंदिर बनवाइन , रामलला केरी स्थापना कीन गै। लेकिन बाद मां मुगल ई पर फिर कब्जा कै लिहिन।
सन् 1853 मां हिन्दुओं केर आरोप रहै कि भगवान राम केरे मंदिर का तोड़िके मस्जिद बनी। ई मुद्दे पर हिन्दुन और मुसलमानन केरे बीच पहली हिंसा भई. ईके बाद सन् 1857 की क्रांति में बहादुरशाह जफर केरे समय मां बाबा रामचरण दास एक मौलवी आमिर अली केरे साथ जन्मभूमि के उद्धार का प्रयास किहिन। कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमन का ई बात स्वीकार नाय भई और उनके विरोध केरे चलत 18 मार्च सन् 1858 को कुबेर टीला स्थित एक इमली केरे पेड़ मां दोनौं का एकसाथ अंग्रेज फांसी पर लटकाय दिहिन।
ई विवाद के चलत 1859 मां ब्रिटिश शासक विवादित स्थल पर बाड़ लगवाय दिहिन और परिसर केरे भीतरी हिस्से मां मुसलमान और बाहरी हिस्से मां हिन्दुन का प्रार्थना करै केर अनुमति मिली।
19 जनवरी 1885 का हिन्दू महंत रघुबीर दास पहिली बार ई मामले का फैजाबाद केरे न्यायाधीश पं. हरिकिशन केरे सामने रक्खिन। ई मामले मां कहा गा कि मस्जिद केरी जगह पर मंदिर बनै , ई स्थान प्रभु श्रीराम केर जन्म स्थान है।
वर्ष 1947 मां भारत सरकार मुसलमानन का विवादित स्थल से दूर रहै के आदेश दिहिस और मस्जिद केरे मुख्य द्वार पर ताला डारि दीन गा जबकि हिन्दू श्रद्धालु एक अलग जगह से प्रवेश दिए जात रहे।
1949 में भगवान राम केरी मूर्ति मस्जिद मां पाई गईं। कहा जात है कि कुछ हिन्दूओं ई मूर्ति हुवां रखवाइन। मुसलमान ई पर विरोध व्यक्त किहिन और दूनौ पक्ष ई पर अदालत मां मुकदमा दायर कर दिया। सरकार ई स्थल का विवादित घोषित कैके ताला लगवाय दिहिस।
1984 मां कुछ हिन्दू लोग विश्व हिन्दू परिषद केरे नेतृत्व मां भगवान राम केरे जन्मस्थल का ‘मुक्त’ करावै और हुवां राम मंदिर का निर्माण करै के लिए एक समिति केर गठन किहिन। बाद मां ई अभियान केर नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी केरे प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी संभाल लिहिन।
1986 मां जिला मजिस्ट्रेट हिन्दुन का प्रार्थना करै के लिए विवादित मस्जिद केरे दरवाजे केर ताला खोलै केर आदेश दिहिन। मुसलमान ईके विरोध मां बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति केर गठन किहिन।
1989 में विश्व हिन्दू परिषद राम मंदिर निर्माण केरे लिए अभियान तेज किहिस और विवादित स्थल केरे नजदीक राम मंदिर केरी नींव रखी गै। वहे साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय आदेश दिहिस कि विवादित स्थल के मुख्य द्वार खोल देक चाही और ई जगह हमेशा के लिए हिन्दुन का दै देक चाही।
. 30 अक्टूबर 1990 को हजारन रामभक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव द्वारा खड़ी कीन गईं अनेक बाधा पार कैके अयोध्या मां प्रवेश किहिन और विवादित ढांचे केरे ऊपर भगवा ध्वज फहराय दिहिन। 2 नवंबर 1990 का मुलायम सिंह यादव कारसेवकन पर गोली चलावै केर आदेश दिहिन जी मां सैकड़न रामभक्तों अपने जीवन केरी आहुति दै दिहिन। सरयू तट रामभक्तन केरी लाशन से पटि गा रहै। साहित्य मां ऊ समय केरी झांकी देखात है।कितनी पीड़ा आम हिन्दू जनमानस मां रहै-
“सरयू तुम
बहती रहीं
उस समय भी
जब राम ने
अर्चना की तुम्हारी
जब सीता ने
शीश नवाया तुमको
पुलकित जय जयकार
की मैंने
उस समय भी
बहती रहीं तुम
जब एक आततायी
आया
और क्रूरता से
तोड़ा गया मंदिर
मेरी आहें कराहें
गूंजती रहीं तट पर तुम्हारे
बनी मस्जिद
ताले पड़े
तुम तब भी बहती रहीं
सरयू निर्विकार
एक दिन
फूटा ज्वार
ढही मस्जिद
कारसेवकों के रक्त का
हुआ तर्पण
मैं भी थी उल्लास में
तुम्हारे तट पर तुम्हारे साथ
अशरीर
अब जब बनेगा मंदिर
हमारे राम का
तभी आऊंगी
इस जन्म में
नहीं तो
जन्म जन्मांतर में
मेरी प्रतीक्षा करना सरयू!”

ई हत्याकांड केरे बाद अप्रैल 1991 मां उत्तरप्रदेश केरे तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव का इस्तीफा देयक परा।
ईके बाद लाखन रामभक्त 6 दिसंबर का कारसेवा करै अजोध्या पहुंचे। 6 दिसंबर 1992 का बाबरी ढांचा ढहाय दीन गा,जीके कारन देशभर मां दंगे भए।विश्वभर मां हजारों मंदिर मुस्लिम कट्टरपंथी तोडिन।
6 दिसंबर 1992 का जब विवादित ढांचा गिरावा गा, ऊ समय राज्य मां कल्याण सिंह केरी सरकार रहै। ऊ दिन सुबह करीब 10.30 बजे हजारन-लाखन की संख्या मां कारसेवक पहुंचै लगे। दोपहर मां 12 बजे केरे करीब कारसेवकन केर एक बड़ा जत्था मस्जिद केरी दीवार पर चढ़ै लागत है। लाखन केरी भीड़ का संभारब सब के लिए मुश्किल होइगा। दोपहर केरे 3 बजकर 40 मिनट पर पहिला गुंबद भीड़ तोड़ि दिहिस और फिर पांच बजै मां जब पांच मिनट केर वक्त बाकी रहै, तब तक पूरे क पूरा विवादित ढांचा जमींदोज होय चुका रहै। भीड वहे जगह पूजा-अर्चना किहिस और ‘राम शिला’ केरी स्थापना कै दिहिस। पुलिस केरे आला अधिकारी मामले केरी गंभीरता का समझि रहे रहैं। गुंबद केरे आसपास मौजूद कारसेवकन का रोकै केरी हिम्मत कोई मां नाय रहै।
सुप्रीम कोर्ट मां हालै मां लगातार सुनवाई चली।होय सकत है जब तक ई अंक छपै, कोर्ट केर फैसला आय जाय।हम लोगन का देश केरी सर्वोच्च अदालत से न्याय केरी आशा और विश्वास है। आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी के मुख्यमंत्री रहत भए, मंदिर न बना,तौ फिर कोई आशा नाय है।
फ़िराक़ गोरखपुरी लिखिन हैं-
“नई हुई फिर रस्म,पुरानी दीवाली के दीप जले।
शाम सुहानी रात सुहानी दीवाली के दीप जले।।
लाखों लाखों दीपशिखाएं,देती हैं चुपचाप आवाजें,
लाख फसाने एक कहानी,दीवाली के दीप जले।।”
इंसान चिल्लातै रहा।अंधेर है।अंधेर है। कहां है उजेर?ऋषि लिखिन-
“असतो मां सद्गमय।तमसो मा ज्योतिर्गमय।मृत्योर्मामृतं समय।”
कुछ न भवा।अंधेरेन से लड़ाई चलतै रही। संकल्प बार बार विजयी होत है।एक दीपक घने अंधेरेन से लडत है।ताकत भर मुकाबला करत है ।यहै मनुष्यत्व है।जूझै केर संकल्प मनुष्यत्व है।अंधेरा चाहै जेतना बलवान होय ईसे न जीती।
अटल जी लिखिन-
आओ फिर से दिया जलाएं।
भरी दुपहरी में अंधियारा,सूरज परछाईं से हारा।
अंतरतम का नेह निचोडें,बुझी हुई बाती सुलगाएं।।
आओ फिर से दिया जलाएं।
दिवाली पर पटाखेन केर विरोध होय लगत है।होली पर पानी बचावै केर नसीहत मिलै लागत है।सब हिन्दू त्यौहारन केरी आलोचना।नालिन मां लहू बहत है,तौ कोई बुराई नाय देखात इनका।एक जनवादी साहित्यकार लिखिन कि मुख्यमंत्री का दिवाली न मनावैक चाही अजोध्या मां।काहे भाई?हिन्दू अपनी अजोध्या मां दिवाली न मनावैं,तौ का अमरीका जाय के मनावैं?अब ई देश मां दादागिरी न चली। बहुत दिन हिन्दू आस्था पर चोट किहेव।अब बस।अब समय आयगा है कि हम लोग सोची कि दक्षिण भारत के हजारन मंदिर मौजूद हैं। उत्तर भारत केरे लाखन मंदिर कहां गे?को मिटाय दिहिस एक जीतीजागत भई संस्कृति का?
दिवाली तौ एक जीवनधारा है,जीवन केरा विहाग राग है।जीवन केरे अंधेरेन से जूझि रहे जनमानस के लिए प्रकाश केरी किरन है।धरती केर पारिजात है दिवाली।पुरइन के पात पर ओसबूंद केर उजला सौंदर्य है दिवाली।
आखिर हमार प्रतीक्षा कब खत्म होई?हिन्दू केर दर्द हिन्दुस्तान मां कब समझा जाई?
“हमें चाहिए क्या?
एक तुलसी चौरा,
एक मंदिर,
जो बहुत अच्छा न हुआ
तो पीपल के नीचे
बना कर चबूतरा
पूज लेते हैं
हम अपने देव
किसी का पूजाघर
न तोड़ने गये कभी।
किसी का घर
न छीनने गये कभी।
हम तो नदी को,
गाय को ,
पंछी को-
सबको मान
देते रहे
सूरज को,
चांद को,
धरती को
माथा नवाते रहे
सबके कल्याण की
करते रहे कामना
फिर भी हम
दुश्मन हैं
कभी कश्मीर से,
कभी पाकिस्तान से,
कभी बांग्लादेश से
निष्कासित होते हैं
हम ही।
हमारा गुनाह क्या है?
आलिमों !
बताओ जरा
क्यों खटकते हैं
हम नजर में
किरकिरी बन कर?
हमारे तीर्थ भी
छीन लेना चाहते हो
और यह सोचते हो
हम तुम्हें भाई कहें?
कुछ भी लिखती हूँ
लड़ने आ जाते
निरन्तर
अब कहां हो?
क्यों बंद मुख हैं
तुम्हारे?
मैं सभी का आह्वान
करती हूँ
दिखाओ देश यह है तुम्हारा
आतंक के घिनौने चेहरे
पर पहला वार
मैंने कर दिया है।
मैं नहीं डरती किसी से
जब ऋषियों की चबा कर
अस्थियां
लगाया ढेर नैमिष में
नहीं हुए भयभीत
रावण से लड़े थे हम
तुम्हारी औकात क्या है
ओ पडोसी।”
आपन संस्कृति ,आपन आस्था के लिए संघर्ष जरुरी है।अंधेरेन से एक दिया लडि सकत है,तौ मनुष्य काहे विश्वास खोवै? बालकवि बैरागी जी लिखिन-
“आज मैंने सूर्य से बस, जरा सा यूं कहा,
आपके साम्राज्य में इतना अंधेरा क्यों रहा?
तमतमा कर वह दहाड़ा, मैं अकेला क्या करुं?
तुम निकम्मों के लिए, मैं ही भला कब तक मरुं?
आकाश की आराधना के, चक्करों में मत पड़ो।
संग्राम यह घनघोर है, कुछ मैं लड़ूं कुछ तुम लड़ो।

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