ग्राम टुडे ख़ास

तीर्थस्थलों पर व्यवसाय पर कोरोना का प्रभाव

सच्ची घटना


मानसी मित्तल

ये दस पंद्रह दिन पहले की ही बात है।मेरे पति व इनके कुछ दोस्तों ने पूर्णागिरी देवी के दर्शन करने का प्रोग्राम बनाया था। सुबह के चार बजे निकलना था। सभी ने अपना कुछ जरूरी सामान यानी कुछ कपड़े , मंजन वगैहरा आदि एक बैग में डाला और अपनी यात्रा के लिए चार बजे निकल पड़े।
टनकपुर पहुंचने के बाद थोड़ा आराम कर और फ्रेश हो कर देवी के दर्शन को रवाना हो गए।
फिलहाल कोरोना काल होने की वजह से वहाँ बहुत कम यात्री पहुँच रहे हैं। अब सोचने वाली बात ये है कि दुकानदारों को तो रोजी रोटी का इंतजाम यात्रियों के आवागमन से ही होता है।
अधिकांश तीर्थस्थलों पर देखने को भी मिलता है कि यात्रियों से ही उनका रोजगार है। और आप जानते ही हैं जब से कोरोना बीमारी आयी है तब से देश का बुरा हाल है,खासकर तीर्थस्थलों पर।
अब रास्ते में जो भी दुकानें हैं सभी दुकानदार बिल्कुल खाली हैं। ऐसे में उनको वहाँ एक वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है। अब वह अपनी दुकानों को छोड़कर कहीं जा भी नही सकते।
जब सभी दोस्त देवी दर्शन के लिए तैयार होकर निकले तब सभी दुकानदारों की निगाहें इन सभी दोस्तों पर थीं। सभी दुकानदार कहने लगे कि बाबूजी आज अभी तक कोई बोनी भी नही हुई है कृपया हमारी दुकान से प्रसाद लो ना। सबका दिल खुश करने के लिए सभी दोस्तों ने सभी दुकानों से थोड़ा थोड़ा प्रसाद लिया जैसे कही से चुनरी ,कही से मुरमुरे, कही से कुछ और वगैहरा वगैहरा। पर सभी के मन मे मलाल था कि हम इनके लिए कुछ कर भी नही पा रहे हैं
दुखी मन से सभी दोस्त देवी दर्शन को रवाना हो गए और दर्शन करके माता से इनके दुख दूर करने की अरदास लगाई।
जय हो पूर्णागिरि देवी की।🙏🚩
स्वरचित✍️व मौलिक
मानसी मित्तल
शिकारपुर
जिला बुलन्दशहर
उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!