ग्राम टुडे ख़ास

वर्तमान संकट काल में कोविड टीकाकरण की सार्थकता

अनुज कुमार

कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी को भारतीय सरकार ने 20 मार्च 2020 को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया था। जिसके चलते केंद्र सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी। परिणाम स्वरूप देश की जनता अपने-अपने घरों में कैद होने पर मजबूर हो गई। उस समय इस महामारी से बचने का एक मात्र उपाय यही था। ‘दो गज दूरी, मास्क है जरूरी’ जैसे स्लोगन को आत्मसात करने वाला और थोड़ी देर बाद अपने हाथों को धोने वाला ही इस महामारी से बच सकता था। डेढ़ साल बीत जाने पर भी इस महामारी से छुटकारा नहीं मिल पाया है। किन्तु भारतीय वैज्ञानिकों ने दिन रात कड़ी मेहनत कर कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु एक प्रभावकारी वैक्सीन तैयार की है। जो कि कोरोना वायरस से बचने का एक मात्र विकल्प है। महामारी रूपी अंधकार में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई वैक्सीन उस प्रकाश की तरह है जो अंधकार को मिटाने की क्षमता रखता है। किन्तु भारतीय समाज में केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए टीके को लेकर अफवाहें भी जोरों फैल रही हैं जिसके चलते लोग सरकार द्वारा मुफ्त टीकाकरण अभियान में शामिल होने से घबरा रहे हैं। यह समस्या शहरों में उतनी नहीं है जितनी की ग्रामीण इलाकों में है। कोरोना महमारी ने न जाने कितने परिवारों को उजाड़ कर रख दिया। मौत के मातम और उसकी भयावहता के बीच भारत निरंतर जूझ रहा है। वैक्सीन ही इस बीमारी से बचाव का एक मात्र तरीका है। जिसके लिए लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। टीके से जुड़ी अफवाहें, भ्रांतियाँ, अंधविश्वास और लोगों के बीच फैले डर को समाप्त कर कोविड टीकाकरण की सार्थकता से लोगों को अवगत कराना होगा। कोविड के विरुद्ध जो लड़ाई चल रही है उसको और मजबूत करने के लिए हमारे देश के पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि ‘टीका लगवाएँ, कोविड के खिलाफ लड़ाई को मजबूती दें।’

एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं जिनमें लोग टीका न लग पाए इसके लिए तालाब में घुस जा रहे हैं। और मेडिकल टीम के साथ बिल्कुल सहयोग नहीं कर रहे हैं वहीं कुछ क्षेत्रों से सकारात्मक खबरे भी आ रही हैं। ऐसी ही एक खबर है कश्मीरी घाटी के बंदीपोरा जिले के वेयान गाँव की। जहां के सभी वयस्कों ने कोरोना का टीका लगवा कर ऐसी मिसाल दी है जिसके तहत वह देश का पहला ऐसा गाँव बन चुका है जहां सभी वयस्कों ने कोरोना का टीका लगवा लिया है। जिस प्रकार जम्मू कश्मीर की सरकार ने लोगों के पास जा जा कर उन्हें समझाया और उनके विश्वास को जीत कर यह कारनामा कर दिखलाया है ठीक उसी प्रकार अन्य राज्यों को भी कुछ इसी प्रकार की रणनीति की जरूरत है। जो लोगों के भीतर से टीके से संबन्धित भ्रांतियों को दूर कर सके।

इसके लिए जरूरी है कि सरकारें सतर्क रहें। स्वास्थय कर्मी भी समर्पित भाव से अपना काम ईमानदारी से करें और नागरिकों का भी दायित्व है कि वह सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान में अपना पूरा सहयोग दें। क्योंकि वैज्ञानिक रूप से यह साबित हो चुका है कि वैक्सीन पूर्ण रूप से सुरक्षित है और कोरोना से बचाव का यह एक मात्र हथियार है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि प्रत्यक व्यक्ति अपना और परिवार के सभी पात्र सदस्यों का टीकाकरण जरूर करवाएँ। संक्रमण के खिलाफ जंग में टीकाकरण सबसे प्रमुख हथियार है। कहा जा रहा है कि सितंबर से अक्तूबर के बीच तीसरी लहर अपने पैर भारत में पसार सकती है। जिसकी तैयारी में भारत सरकार जुटी हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय जो टीका लगाया जा रहा है। वह कोरोना के बीटा, डेल्टा और अन्य स्ट्रेनों के खिलाफ कारगर है। कोरोना स्ट्रेन बदलता रहता है। किन्तु वर्तमान समय में जो वैक्सीन लगाई जा रही है। वह वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित है। टीकाकरण को लेकर सरकार ने ‘जान है तो जहान है’ नामक अभियान चलाया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने ‘टीके से अदावत, कोरोना को दावत’ जैसे स्लोगन का प्रयोग कर लोगों को जागरूक किया।

इस प्रकार हम देख सकते हैं कि कोरोना से बचाव का एक मात्र तरीका वैक्सीन ही है। उसकी सार्थकता को वैश्विक स्तर पर स्वीकारा जा चुका है। कोरोना महामारी से यदि जंग जीतनी है तो हमें वैक्सीन रूपी हथियार का सहारा लेना ही पड़ेगा।  

अनुज कुमार
शोधार्थी
हिन्दी विभाग
दिल्ली विश्वविद्यालय
फोन नं. 7982232667

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