कवितासाहित्य

अंजु दास गीतांजलि

__अंजु दास गीतांजलि

छिपा लो पलक भींग जाने से पहले
ज़रा सोचलो दूर जाने से पहले
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बड़ा गर्म है बेवफाई का आलम
ज़रा पास आ दूर जाने से पहले
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मुहब्बत जतालो अभी पास आके
सजन अपना दामन छुड़ाने से पहले
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बहुत प्यार है तुमसे देखो कभी तुम
मुझे आँसुओ में नहाने से पहले
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तेरे प्यार से बढ़ के जन्नत नहीं है
मिटाने चला घर बनाने से पहले
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मेरी जिंदगी है तुम्हारी अमानत
चले आओ तुम सांस जाने से पहले
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ये अंजू तुम्हारी दिलों जां जिगर है
कभी सोचना दिल दुखाने से पहले
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अंजु दास गीतांजलि.

पूर्णियां

बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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