साहित्य

अंहकार रूपी रावण

विजयादशमी

निर्मला सिन्हा

था सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी दसों वेदों का ज्ञाता ।
शिव शंकर का महाभक्त पुजारी
पंडितों से भी बड़ा पंडित था महापंडित वो ।
नहीं देख सकता था वो अत्याचार होते कहीं ।
सोने की लंका का राजा था वो
क्या चीज कि कमी थी उसके पास
हर चीज तो था उसके पास ।
इतने सारे चीजों में एक और चीज बढ़ गया था उसके पास वो था अहंकार ।
अहंकार रूपी रावण का अहंकार खत्म करनें के लिए आए राम जी
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी पतित पावन सिया राम जी ।।
अब गढ़ टूटेगा झूठ का, सत्य की होगी जीत चाहें सच्चाई की राह पर लाख बिछे हो शूल ।।
अहंकारी रावण का अब होगा अंत
असत्य पर सत्य का अब लहराएगा पताका ।।

लेखिका साहित्यकार कवियत्री निर्मला सिन्हा ग्राम जामरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ से

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